दूसरे राज्य का आरक्षण यहां लागू नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- हर राज्य की सामाजिक स्थिति अलग

Update: 2026-04-16 08:26 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक राज्य में मिलने वाला आरक्षण लाभ दूसरे राज्य में लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि विभिन्न राज्यों के पिछड़े वर्गों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं।

जस्टिस संजीत पुरोहित की पीठ ने यह टिप्पणी NEE-PG सीट आवंटन में आरक्षण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की।

अदालत ने कहा,

“अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का निर्धारण प्रत्येक राज्य की अपनी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। यह मान लेना कि सभी राज्यों के पिछड़े वर्गों की स्थिति एक जैसी है, सही नहीं है।”

हाईकोर्ट ने साफ किया कि किसी भी आरक्षित वर्ग का लाभ केवल उसी राज्य तक सीमित रहता है, जहां उसे अधिसूचित किया गया। दूसरे राज्य में जाकर उसी आधार पर आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षण का लाभ “मूल राज्य” तक सीमित रहता है। दूसरे राज्य में स्थानांतरण के बाद इसे लागू नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान यह भी दलील दी गई कि यदि किसी श्रेणी की सीटें खाली रह जाती हैं तो उन्हें अन्य राज्यों के आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को रियायती अंकों के साथ दिया जाना चाहिए। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह तर्क कानूनन स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने कहा,

“किसी विशेष श्रेणी की सीट के लिए उम्मीदवार को उसी श्रेणी के निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा। अन्य श्रेणी के अंकों के आधार पर प्रवेश देना चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करेगा।”

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि पीजी मेडिकल सीटें महत्वपूर्ण हैं और उन्हें खाली नहीं रहना चाहिए लेकिन यह उद्देश्य न्यूनतम योग्यता मानकों और संवैधानिक व्यवस्था से ऊपर नहीं हो सकता।

अंत में अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अन्य राज्यों के आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार सामान्य श्रेणी में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं लेकिन उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।

Tags:    

Similar News