बालिग होने में केवल 4 दिन बाकी थे: सहमति से संबंध का हवाला देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO मामले में दी जमानत
राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO Act से जुड़े मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि कथित घटना के समय पीड़िता बालिग होने से केवल चार दिन दूर थी और परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि दोनों के बीच सहमति से संबंध था।
जस्टिस संजीत पुरोहित ने आदेश में कहा कि कथित घटना के समय पीड़िता वयस्कता की दहलीज पर थी, इसलिए उसकी समझ को एक परिपक्व युवती के समान माना जा सकता है।
अदालत ने यह भी नोट किया कि बालिग होने के तुरंत बाद पीड़िता ने अपने परिवार से सुरक्षा की मांग करते हुए अदालत का रुख किया और तब से वह आरोपी के परिवार के साथ रह रही है।
अदालत के समक्ष पीड़िता ने अपने बयानों में स्पष्ट रूप से आरोपी से विवाह करने की इच्छा जताई। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके परिजन उसकी इच्छा के विरुद्ध उसकी शादी कहीं और कराना चाहते थे।
मामला कथित अपहरण से संबंधित जमानत याचिका का था। आरोपी की ओर से कहा गया कि FIR झूठी है और पीड़िता के परिवार ने दोनों के संबंध का विरोध करते हुए मामला दर्ज कराया।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि जब परिवार ने पीड़िता पर दूसरी जगह विवाह का दबाव बनाया तब वह स्वेच्छा से घर छोड़कर आरोपी के साथ गई।
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति कानूनन महत्वहीन है।
राज्य ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी ने कम उम्र का फायदा उठाकर उसे प्रभावित किया।
हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पीड़िता ने निचली अदालत के समक्ष भी कहा कि वह अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई और उसके साथ रहने के दौरान जो कुछ हुआ, वह उसकी सहमति से हुआ।
अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि पीड़िता के परिवार ने उसके संबंध का विरोध और उसकी मर्जी के खिलाफ विवाह कराने की मंशा से FIR दर्ज कराई।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत दी।