बरी होने के बाद नौकरी से निकाले गए कर्मचारी को दोबारा नौकरी पर रखे जाने तक का बकाया वेतन पाने का हक: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में बरी होने के बाद नौकरी से निकाला जाता है तो वह नौकरी से निकाले जाने और दोबारा नौकरी पर रखे जाने के बीच की अवधि के लिए बकाया वेतन पाने का हकदार होता है।
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इंद्रजीत सिंह की डिवीजन बेंच ने कहा कि भले ही बाद में बरी होने से पहले की सजा के कानूनी नतीजे पीछे की तारीख से खत्म नहीं होते, लेकिन बरी होने के बाद की गई बर्खास्तगी पर यह सिद्धांत लागू नहीं होता।
बता दें, अपीलकर्ता को मई 2017 में एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया। आखिरकार जून 2017 में बरी कर दिया गया। हालांकि, सजा के आधार पर उसे अगस्त 2017 में, यानी बरी होने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया। जब गलती का एहसास हुआ तो याचिकाकर्ता को फरवरी 2018 में दोबारा नौकरी पर रख लिया गया।
उसे मौद्रिक लाभों को छोड़कर सभी संबंधित लाभ पाने का हकदार माना गया। इसलिए सिंगल जज के आदेश को इस हद तक चुनौती दी गई कि बरी होने के बाद नौकरी से निकाले जाने और दोबारा नौकरी पर रखे जाने के बीच की अवधि के लिए बकाया वेतन नहीं दिया गया।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 'रणछोड़जी चतुर्जी ठाकोर बनाम सुपरिटेंडेंट इंजीनियर, गुजरात इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड, हिम्मतनगर' मामले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि चूंकि बर्खास्तगी और उसके परिणामस्वरूप सेवा न दे पाना किसी अनुशासनात्मक कार्यवाही का नतीजा नहीं है, बल्कि याचिकाकर्ता का खुद किसी अपराध में शामिल होना है, इसलिए वह बकाया वेतन का हकदार नहीं है।
इसके अलावा 'बलदेव सिंह बनाम भारत संघ' मामले का भी हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया कि सरकारी कर्मचारी के बाद में बरी होने से सजा तो खत्म हो जाती है, लेकिन सजा के कानूनी नतीजे पीछे की तारीख से खत्म नहीं होते।
साथ ही कोर्ट ने 'राज नारायण बनाम भारत संघ और अन्य' मामले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि ऐसी स्थिति में कर्मचारी केवल बरी होने की तारीख से लेकर दोबारा नौकरी पर रखे जाने की तारीख तक के बकाया वेतन का हकदार होता है। इस स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि चूंकि इस मामले में नौकरी से हटाने की तारीख बरी होने की तारीख के बाद की थी, इसलिए याचिकाकर्ता नौकरी से हटाए जाने की तारीख से लेकर दोबारा नौकरी पर रखे जाने की तारीख तक का बकाया वेतन पाने का हकदार होगा।
इसके अनुसार, बकाया वेतन न देने का आदेश वाला हिस्सा रद्द कर दिया गया।
Case Title : Dalbeer Singh v State of Rajasthan & Ors