राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नई 'लिटिगेशन पॉलिसी' बनाने के लिए 5 हफ्ते का समय दिया, मुख्य सचिव को दी चेतावनी
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नई 'लिटिगेशन पॉलिसी' (मुकदमेबाजी नीति) बनाने के लिए 5 हफ्ते का आखिरी मौका दिया। इस नीति का उद्देश्य ऐसा प्रभावी सिस्टम तैयार करना है, जिससे बरी किए जाने के फैसलों के खिलाफ अपील दायर करने में होने वाली देरी को रोका जा सके।
जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि अगर तय समय-सीमा के भीतर नई नीति नहीं बनाई जाती है, तो अगली सुनवाई पर मुख्य सचिव, प्रधान विधि सचिव और वित्त सचिव को खुद कोर्ट में मौजूद रहना होगा।
दरअसल, कोर्ट आपराधिक अपीलों के एक समूह पर सुनवाई कर रहा था, जिन्हें राज्य सरकार ने आरोपियों के बरी होने के काफी समय बाद दायर किया। 'लिमिटेशन एक्ट' (परिसीमा अधिनियम) की धारा 5 के तहत दायर आवेदनों को कोर्ट ने बहुत ही सतही (औपचारिकता मात्र) माना, इसलिए राज्य सरकार को एक अतिरिक्त हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
बाद में यह बात सामने आई कि अगर अतिरिक्त हलफनामों में दिए गए स्पष्टीकरणों को मान लिया जाता और अपीलों को स्वीकार किया जाता तो इससे राज्य सरकार को हर मामले में देरी से अपील दायर करने की एक तरह से 'छूट' मिल जाती।
इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रस्ताव दिया कि वे एक नई 'लिटिगेशन पॉलिसी' लेकर आएंगे।
हालांकि, कोर्ट ने गौर किया कि कई मौके मिलने के बावजूद, अभी तक कोई नई नीति लागू नहीं की गई।
इसलिए कोर्ट ने राज्य सरकार को नई नीति लाने के लिए 5 हफ्ते का आखिरी मौका दिया। साथ ही, यह भी निर्देश दिया कि अगर राज्य सरकार तय समय-सीमा का पालन करने में विफल रहती है, तो संबंधित अधिकारियों (मुख्य सचिव, प्रधान विधि सचिव और वित्त सचिव) को कोर्ट में पेश होना होगा।
Case Title : State of Rajasthan v Dinesh, and other connected appeals