क्या सर्विस ट्रिब्यूनल प्रमोशन परीक्षा के अंकों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर सकता है? राजस्थान हाईकोर्ट ने वकीलों से राय मांगी
राजस्थान हाईकोर्ट ने वकीलों (बार सदस्यों) से इस बात पर राय मांगी है कि क्या 'सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल' (ट्रिब्यूनल) राज्य प्राधिकरणों द्वारा प्रमोशन के लिए आयोजित किसी भी विभागीय परीक्षा में अंकों के गलत मूल्यांकन, अनुचित अंक दिए जाने, या प्रश्न-उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर सकता है और उन पर फैसला दे सकता है।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रिब्यूनल के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत राज्य को एक नया बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया गया। इस बोर्ड को प्रतिवादी (याचिकाकर्ता) की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन करना था, और यदि वह योग्य पाया जाता तो उसे सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोशन की आगे की प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति देनी थी।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि क्या ट्रिब्यूनल इस तरह का निर्देश दे सकता है। यह सवाल 'राजस्थान सिविल सर्विसेज (सर्विस मैटर्स अपीलेट ट्रिब्यूनल्स) एक्ट, 1976' की धारा 2(f) के संदर्भ में पूछा गया, जो उन 'सर्विस मामलों' (सेवा संबंधी विषयों) को तय करती है जिन्हें ट्रिब्यूनल के सामने लाया जा सकता है।
कोर्ट ने बताया कि प्रतिवादी द्वारा ट्रिब्यूनल में दायर अपील में धारा 2(f) में बताए गए किसी भी विषय को चुनौती नहीं दी गई। इसके बजाय, चुनौती इस बात पर थी कि अंकों का मूल्यांकन गलत तरीके से किया गया और परीक्षा में दिए गए उत्तरों के लिए सही अंक नहीं दिए गए।
राज्य की ओर से दलील दी गई कि ट्रिब्यूनल के पास इस अपील पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) नहीं है। इसके विपरीत प्रतिवादी के वकील ने कहा कि जब इसी तरह की स्थिति वाले अन्य लोगों ने इस कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, तो संबंधित बेंच ने उन्हें अपनी याचिका वापस लेने और कोई अन्य कानूनी रास्ता (Alternative Remedy) अपनाने की छूट दी थी।
जब कोर्ट ने प्रतिवादी के वकील द्वारा बताए गए उन आदेशों को देखा तो पाया कि उनमें कहीं भी यह नहीं लिखा था कि ट्रिब्यूनल के सामने अपील दायर करने की छूट दी गई।
इस पृष्ठभूमि में कोर्ट ने माना कि इस मामले पर विचार करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक (stay) लगा दी और वकीलों से इस सवाल पर अपनी राय देने को कहा।
इसके अनुसार, रजिस्ट्री को एक नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।
इस मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर, 2026 को होगी।
Case Title : State of Rajasthan & Ors. v Sharwan Lal