पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 50 किलो बीफ़ बेचने के मामले में गुमराह किए जाने का दावा खारिज किया, अग्रिम ज़मानत देने से किया इनकार
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 62 साल के एक व्यक्ति की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की, जिसे कथित तौर पर कानूनी पाबंदियों का उल्लंघन करते हुए 50 किलो बीफ़ सप्लाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने कहा कि इस अवैध व्यापार में शामिल बड़े नेटवर्क का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ ज़रूरी है।
जस्टिस आराधना साहनी ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे बेचने वालों ने गुमराह किया, जिन्होंने कथित तौर पर उसे बताया कि मांस बीफ़ नहीं है। कोर्ट ने इसे एक चालाकी भरी चाल और बाद में सोचा गया बहाना बताया, जिस पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है।
यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 482 के तहत चंडीगढ़ में दर्ज FIR में अग्रिम ज़मानत के लिए दायर की गई। याचिकाकर्ता को शुरू में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 299 के तहत गिरफ्तार किया गया। बाद में पंजाब गोहत्या निषेध अधिनियम, 1955 की धारा 8 भी जोड़ी गई।
FIR गौ रक्षा दल के अध्यक्ष अमित शर्मा की शिकायत पर दर्ज की गई, जिन्होंने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता दोपहिया वाहन पर बीफ़ सप्लाई कर रहा था। सूचना मिलने पर शिकायतकर्ता और अन्य लोग मौके पर पहुंचे, जहां याचिकाकर्ता एक्टिवा स्कूटर के पास खड़ा मिला। जांच करने पर वाहन से कथित तौर पर लगभग 50 किलो संदिग्ध बीफ़ बरामद किया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, याचिकाकर्ता ने मौके पर दावा किया कि मांस भैंस का मांस था और उसने मालेरकोटला (पंजाब) और सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के विक्रेताओं द्वारा जारी किए गए दो बिल पेश किए। पुलिस ने मांस के सैंपल ज़ब्त किए और उन्हें नेशनल मीट रिसर्च इंस्टीट्यूट, चेंगिचेरला, हैदराबाद भेजा। फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, मांस की पहचान बोस इंडिकस (बैल/सांड) के रूप में हुई।
फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद FIR में पंजाब गोहत्या निषेध अधिनियम की धारा 8 जोड़ी गई। याचिकाकर्ता को शुरू में BNS के तहत अपराध के लिए ज़मानत दी गई थी, कथित तौर पर नोटिस जारी होने के बाद जांच में शामिल नहीं हुआ।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उसे झूठा फंसाया गया और उसने विक्रेताओं के बयानों पर भरोसा करते हुए इस नेक इरादे से मांस खरीदा था कि यह भैंस का मांस है। यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ स्थानीय लोग सड़क किनारे विक्रेताओं से पैसे वसूल रहे थे और जब उसने पैसे देने से मना किया तो उसे झूठे केस में फंसा दिया।
याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा लिया गया बचाव बाद की सोच थी और अविश्वसनीय था, खासकर इसलिए क्योंकि मांस दो अलग-अलग जगहों से लाया गया। यह तर्क दिया गया कि इस अपराध के गंभीर सांप्रदायिक परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि हिंदू धर्म में गाय को पवित्र स्थान प्राप्त है।
कोर्ट ने निकिता जगन्नाथ शेट्टी @ निकिता विश्वजीत जाधव बनाम महाराष्ट्र राज्य (2025 AIR SC 3375) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें दोहराया गया कि अग्रिम जमानत एक असाधारण उपाय है। इसे नियमित रूप से नहीं दिया जाना चाहिए।
ज़ब्त किया गया मांस बैल/सांड का था, इस बात की पुष्टि करने वाली फोरेंसिक रिपोर्ट पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता के विक्रेताओं द्वारा गुमराह किए जाने का दावा खारिज कर दिया, इसे "एक चालाक चाल और बाद की सोच" करार दिया। कोर्ट ने कहा कि गाय के मांस के अवैध वध और बिक्री में शामिल पूरी चेन का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ ज़रूरी है।
अग्रिम जमानत देने के लिए कोई असाधारण परिस्थिति न पाते हुए कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में याचिकाकर्ता अग्रिम जमानत की असाधारण राहत का हकदार नहीं है।
Title: NOOR MOHAMMAD v. STATE OF U.T CHANDIGARH