बेअंत सिंह हत्या मामले के दोषी जगतार सिंह हवारा की पैरोल अर्जी पर जल्द फैसला लिया जाए: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा की पैरोल अर्जी पर शीघ्र निर्णय लेने के निर्देश दिए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध प्रक्रिया अपनाकर पैरोल आवेदन का निस्तारण करने को कहा है।
जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने आदेश दिया कि दिल्ली की मंडोली स्थित केंद्रीय जेल संख्या-15 के अधीक्षक एक सप्ताह के भीतर हवारा की पैरोल अर्जी चंडीगढ़ के गृह सचिव को भेजें।
अदालत ने आगे निर्देश दिया कि आवेदन मिलने के चार सप्ताह के भीतर चंडीगढ़ प्रशासन अपने विचार और सिफारिशें जेल अधीक्षक को भेजे। इसके बाद जेल अधीक्षक दो सप्ताह के भीतर पैरोल अर्जी पर कानून के अनुसार अंतिम निर्णय लें।
हवारा ने संविधान के अनुच्छेद 226 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 528 के तहत याचिका दायर कर चार सप्ताह की पैरोल मांगी। उसका कहना था कि उसकी 81 वर्षीय मां उम्र संबंधी शारीरिक और मानसिक बीमारियों से जूझ रही हैं और उनकी देखभाल के लिए उसे अस्थायी रिहाई दी जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट ने बताया कि हवारा को वर्ष 1995 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज मामले में भारतीय दंड संहिता और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। वर्ष 2007 में उसे मृत्युदंड सुनाया गया, जिसे वर्ष 2010 में हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया। इस मामले में राज्य सरकार और हवारा, दोनों की याचिकाएं फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
अदालत को यह भी बताया गया कि हवारा के खिलाफ पहले 36 मामले दर्ज हुए, जिनमें अधिकांश में वह बरी या दोषमुक्त हो चुका है। जिन सात मामलों में उसे दोषी ठहराया गया, उनमें से छह मामलों की सजा वह पूरी कर चुका है। उसने अब तक लगभग 29 वर्ष जेल में बिताए हैं। इस दौरान उसे न तो पैरोल मिली और न ही सजा में कोई राहत। जेल में उसके खिलाफ किसी अनुशासनहीनता की शिकायत भी दर्ज नहीं हुई।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद पैरोल आवेदन पर निर्णय नहीं हो सका, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं था कि इस पर फैसला करने का अधिकार किस प्राधिकरण के पास है। दिल्ली जेल प्रशासन ने यह मानते हुए आवेदन पंजाब सरकार को भेज दिया कि हवारा पंजाब का निवासी है। जबकि हवारा का कहना था कि चूंकि उसका मुकदमा चंडीगढ़ में दर्ज हुआ और वहीं की अदालत ने उसे दोषी ठहराया, इसलिए चंडीगढ़ प्रशासन ही सक्षम प्राधिकारी है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने अदालत को बताया कि लागू कानून के अनुसार अस्थायी रिहाई पर निर्णय उस जेल के अधीक्षक को लेना होता है, जहां दोषी बंद है। हालांकि, आवश्यक टिप्पणियां और सिफारिशें चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से भेजी जाएंगी।
दिल्ली जेल प्रशासन ने भी स्वीकार किया कि आवेदन गलतफहमी के कारण पंजाब सरकार को भेज दिया गया और अब इसे चंडीगढ़ के गृह सचिव को भेजा जाएगा।
सभी पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए पैरोल आवेदन पर समयबद्ध और शीघ्र निर्णय सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए।