पत्नी के कथित अवैध संबंध का पता चलने के तीन महीने बाद हुई आत्महत्या: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी के पिता को दी अग्रिम जमानत
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में आरोपी के पिता को अग्रिम जमानत दी।
अदालत ने कहा कि पत्नी के कथित अवैध संबंध की जानकारी मिलने और मृतक की आत्महत्या के बीच लगभग तीन महीने का अंतर था, जो किसी व्यक्ति के प्रारंभिक मानसिक आघात से उबरने के लिए पर्याप्त और उचित समय माना जा सकता है।
जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,
"कथित अवैध संबंध का पता चलने और मृतक की मृत्यु के बीच लगभग तीन महीने का अंतर है जो इस प्रकार की जानकारी से लगे शुरुआती सदमे से उबरने के लिए पर्याप्त और उचित समय प्रदान करता है।"
मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 482 के तहत दायर अग्रिम जमानत याचिका से संबंधित था।
याचिकाकर्ता के खिलाफ पठानकोट जिले के तारागढ़ थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 और 351(3) (पूर्व में भारतीय दंड संहिता की धारा 306 और 506) के तहत FIR दर्ज की गई।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि शिकायतकर्ता के बेटे की मृत्यु के बाद अस्पष्ट और निराधार आरोपों के आधार पर उन्हें झूठा फंसाया गया।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रत्यक्ष या निकट संबंधी आरोप नहीं है, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता ने मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाया या उसमें सक्रिय सहायता की।
अदालत ने शिकायतकर्ता शकुंतला देवी के बयान का भी परीक्षण किया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसके बेटे की पत्नी का याचिकाकर्ता के बेटे के साथ कथित अवैध संबंध था।
यह कथित संबंध फरवरी 2026 में सामने आया। इसके बाद मई 2026 में मृतक लापता हो गया और बाद में उसका शव बरामद हुआ।
हाईकोर्ट ने कहा कि कथित अवैध संबंध का पता चलने और आत्महत्या के बीच लगभग तीन महीने का अंतर है। ऐसे में आत्महत्या और आरोपित आचरण के बीच आवश्यक निकट संबंध प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं होता।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत प्रदान की।