लॉरेंस ऑफ पंजाब विवाद: रिलीज रोकने के निर्देश पर Zee की याचिका, पंजाब-केन्द्र से जवाब तलब
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने OTT मंच Zee5 पर प्रस्तावित सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब की रिलीज रोकने संबंधी निर्देशों को चुनौती देने वाली Zee एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड की याचिका पर पंजाब सरकार और केन्द्र सरकार से जवाब मांगा।
जस्टिस जगमोहन बंसल ने मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और दोनों सरकारों से जवाब दाखिल करने को कहा।
अब मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
याचिका में Zee एंटरटेनमेंट ने 23 और 24 अप्रैल 2026 को जारी उन पत्रों को चुनौती दी, जिनमें उसे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर आधारित वेब सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब को अपने OTT मंच पर जारी नहीं करने की सलाह दी गई। यह सीरीज 27 अप्रैल को प्रदर्शित होने वाली थी।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने कहा कि राज्य सरकार गैंगस्टर संस्कृति के खिलाफ है और लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े अपराधों का महिमामंडन करने वाले 2600 से अधिक लिंक पहले ही अवरुद्ध किए जा चुके हैं।
ज़ी ने अपनी याचिका में कहा कि सरकार की कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पूर्व-प्रकाशन प्रतिबंध के समान है और यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत प्रदत्त अधिकार का उल्लंघन है।
कंपनी का कहना है कि संबंधित सीरीज केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री, समाचार रिपोर्टों और अभिलेखीय वीडियो पर आधारित तथ्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रस्तुति है, जिसमें किसी अपराध का महिमामंडन या उकसावा नहीं है।
याचिका में यह भी कहा गया कि लोक व्यवस्था का हवाला केवल आशंका या अनुमान के आधार पर नहीं दिया जा सकता तथा अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध वही लगाए जा सकते हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत स्पष्ट रूप से अनुमत हैं।
वहीं पंजाब सरकार का कहना है कि इस प्रकार की सामग्री युवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है और अपराधी गतिविधियों के महिमामंडन का खतरा बढ़ा सकती है।
राज्य ने केन्द्र को भेजे अपने पत्र में कहा था कि ओटीटी मंचों की व्यापक पहुंच के कारण ऐसी सामग्री संवेदनशील दर्शकों को प्रभावित कर सकती है।
गौरतलब है कि इससे पहले 24 अप्रैल को हाइकोर्ट ने इसी वेब सीरीज पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका का निस्तारण किया था, जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ज़ी5 को इसके प्रसारण के खिलाफ सलाह जारी की थी।
अब हाईकोर्ट के समक्ष मुख्य प्रश्न यह होगा कि क्या सरकार बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए किसी सामग्री की रिलीज पर इस प्रकार रोक लगा सकती है।