पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार (7 जनवरी) को हरियाणा सरकार से माता-पिता एवं सीनियर सिटीजन नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 तथा हरियाणा माता-पिता एवं सीनियर नागरिकों के भरण-पोषण नियम 2009 के तहत बुजुर्ग हेल्पलाइन की स्थापना के लिए समय-सीमा बताने को कहा।

चीफ जुस्टिकर शील नागू और जस्टिस सुधीर सिंह की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए हरियाणा सरकार से हलफनामा देने को कहा कि वह उन जिलों की संख्या बताए जहां बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन स्थापित की गई है।

न्यायालय ने कहा कि यदि यह स्थापित नहीं की गई तो सरकार को इसका कारण बताना चाहिए। इसने हरियाणा सरकार को बुजुर्ग हेल्पलाइन की स्थापना के लिए समय-सीमा बताने का भी निर्देश दिया।

जनहित याचिका में वैधानिक बुजुर्ग लाइन हेल्पलाइन के कार्यान्वयन के साथ-साथ हेल्पलाइन के विनियमन के लिए समर्पित कार्यान्वयन एजेंसी की नियुक्ति की मांग की गई।

याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि हरियाणा पश्चिम बंगाल के साथ भारत के उन दो राज्यों में से एक है, जिसने बुजुर्ग नागरिकों के लिए हेल्पलाइन स्थापित करने और उसका प्रबंधन करने के लिए समर्पित कार्यान्वयन एजेंसी नियुक्त नहीं की है।

एक टोल-फ्री सेवा (14567) आपातकालीन सहायता कानूनी सहायता, स्वास्थ्य देखभाल मार्गदर्शन और सामाजिक कल्याण पूछताछ जैसे विभिन्न मुद्दों को संबोधित करती है।

हेल्पलाइन को भारत भर के 26 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया। आपातकालीन सहायता, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य मार्गदर्शन, भावनात्मक समर्थन और सामाजिक कल्याण योजनाओं तक पहुंच सहित कई तरह की सेवाएं प्रदान करता है।

याचिका में कहा गया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 1999, 2011 और 2021 में तीन नीतियाँ भी तैयार की गई हैं, जो हेल्पलाइन स्थापित करने की सरकार की मंशा को दर्शाती हैं। हालाँकि, आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

मामला अब 18 फरवरी के लिए सूचीबद्ध है।

केस टाइटल: रामपाल मल्होत्रा ​​बनाम यूओआई और अन्य।

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