ED ने PMLA की औपचारिकता निभाने के लिए पहले से तैयार किए गिरफ्तारी के आधार: पंजाब मंत्री संजीव अरोड़ा का हाईकोर्ट में आरोप

Update: 2026-05-14 11:58 GMT

पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी गिरफ्तारी के आधार पहले से तैयार कर रखे थे और यह केवल धन शोधन निवारण कानून (PMLA) के तहत औपचारिकता पूरी करने के लिए किया गया।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ के समक्ष हुई।

संजीव अरोड़ा की ओर से सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने अदालत में कहा कि गिरफ्तारी के 17 पन्नों के आधार महज 35 मिनट में टाइप किए गए।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा,

“ED को पुरस्कार मिलना चाहिए। देश के सबसे अच्छे स्टेनो को बुलाकर कहिए कि वह 35 मिनट में इतने पन्ने टाइप करके दिखाए।”

बाली ने दलील दी कि ऐसी परिस्थितियों में गुरुग्राम की स्पेशल कोर्ट को गिरफ्तारी के आधारों को नजरअंदाज करते हुए रिमांड देने से इनकार करना चाहिए था।

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजीव अरोड़ा को 100 करोड़ रुपये के कथित GST घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह मामला उस कंपनी से जुड़ा है, जिसके वह पहले प्रमुख रह चुके हैं।

अरोड़ा ने हाईकोर्ट में गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के आधार और रिमांड आदेश को चुनौती दी। उनका कहना है कि धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत निर्धारित कानूनी सुरक्षा और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया।

उनकी ओर से अदालत को बताया गया कि सभी लेन-देन वैध थे ऑनलाइन किए गए और सीमा शुल्क से जुड़े दस्तावेज भी ED को उपलब्ध कराए गए।

सीनियर एडवोकेट बाली ने अदालत में कहा,

“यह चौंकाने वाला है। मैं एक मंत्री हूं। यह मामला उस समय का है, जब मैं व्यवसायी था। मैं सीमा पार भागने वाला व्यक्ति नहीं हूं, फिर भी मेरे साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया जा रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि ED ने गिरफ्तारी का आधार टालमटोल वाले जवाब बताया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के पंकज बंसल बनाम भारत संघ फैसले में स्पष्ट किया गया कि केवल इस आधार पर गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।

हालांकि, समय की कमी का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 15 मई तक के लिए स्थगित की।

अरोड़ा ने अदालत को यह भी बताया कि वह हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के प्रवर्तक और पूर्व चेयरमैन रहे हैं, जिसे पहले रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। उनका कहना है कि सार्वजनिक पद संभालने के बाद उन्होंने कंपनी के सभी कार्यकारी पदों से इस्तीफा दे दिया था और कंपनी के दैनिक कामकाज में उनकी कोई भूमिका नहीं रही थी।

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