पंजाब निकाय चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान कराने के फैसले को चुनौती खारिज
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज की।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने नगर निकाय आम चुनाव 2026 से पहले यह फैसला सुनाया।
पंजाब में स्थानीय निकाय चुनाव 26 मई को होने हैं जबकि मतगणना 29 मई को की जाएगी।
याचिका में कहा गया कि राज्य चुनाव आयोग ने बिना किसी वैधानिक संशोधन, विधायी मंजूरी या सार्वजनिक परामर्श के अचानक EVM-वीवीपैट प्रणाली छोड़कर बैलेट पेपर से चुनाव कराने का निर्णय लिया।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह फैसला स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की संवैधानिक भावना के खिलाफ है तथा संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(क), 21 और 243जेडए का उल्लंघन करता है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि EVM के साथ वीवीपैट प्रणाली को चुनावी गड़बड़ियों जैसे बूथ कैप्चरिंग, बैलेट भरने और हेरफेर के खिलाफ महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय माना गया।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि बैलेट पेपर पर लौटने का फैसला ईवीएम में किसी तकनीकी खामी के आधार पर नहीं, बल्कि मनमाने प्रशासनिक कारणों से लिया गया प्रतीत होता है। याचिका में राज्य के पिछले चुनावी अनुभवों का हवाला देते हुए संभावित चुनावी अनियमितताओं को लेकर भी चिंता जताई गई।
याचिका में अदालत से मांग की गई कि नगर निकाय चुनाव 2026 केवल EVM और वीवीपैट के जरिए कराए जाएं और बैलेट पेपर से चुनाव कराने संबंधी किसी भी आदेश को रद्द किया जाए।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 243जेडए के तहत स्थानीय निकाय चुनाव कराने का अधिकार केवल राज्य चुनाव आयोग के पास है और इसमें चुनाव आयोग की कोई भूमिका नहीं होती।
हाईकोर्ट ने सभी दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज की।