पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में खराब होती वायु गुणवत्ता को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को पिछले पांच वर्षों का AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) डेटा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिका में चंडीगढ़–पंचकूला–मोहाली क्षेत्र में लगातार गिरती वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई गई।
याचिकाकर्ता स्वयं अदालत में पेश हुए और उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध शहर होने और औद्योगिक गतिविधियां कम होने के बावजूद चंडीगढ़ में वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। विशेष रूप से सर्दियों के दौरान AQI “बहुत खराब”, “गंभीर” और “खतरनाक” श्रेणियों में पहुंच जाता है।
याचिका में यह भी बताया गया कि दिसंबर, 2025 में AQI स्तर 353 और 438 तक पहुंच गया था, जो गंभीर स्वास्थ्य खतरे को दर्शाता है।
खराब हवा के लिए निर्माण कार्यों की धूल, वाहनों का धुआं, कचरा जलाना और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण प्रमुख कारण बताए गए। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी केवल सलाह जारी करते हैं, लेकिन प्रभावी और सख्त कदम नहीं उठाते।
याचिका में यह भी कहा गया कि चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली एक ही वायु क्षेत्र का हिस्सा हैं, लेकिन अलग-अलग प्रशासनिक नियंत्रण के कारण प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह पिछले पांच वर्षों में हर महीने के सबसे खराब AQI स्तर का विस्तृत डेटा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।
मामले की अगली सुनवाई 14 मई, 2026 को होगी।