बीजेपी में शामिल होने के बाद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, राजनीतिक बदले की आशंका से इनकार नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

Update: 2026-05-09 06:26 GMT

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्राइडेंट लिमिटेड की फैक्ट्री पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की ओर से की गई छापेमारी को लेकर कहा है कि राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका प्रथम दृष्टया उचित प्रतीत होती है।

चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि छापेमारी का समय विशेष रूप से सुनवाई योग्य है, क्योंकि कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस राजिंदर गुप्ता ने 24 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा था और उसके कुछ ही दिनों बाद 30 अप्रैल को छापा मारा गया।

अदालत ने कहा,

“वेडनसबरी सिद्धांत के आधार पर देखने पर याचिकाकर्ता कंपनी के मन में यह आशंका कि छापेमारी राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित थी उचित प्रतीत होती है।”

ट्राइडेंट लिमिटेड ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से 30 अप्रैल 2026 को की गई कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। कंपनी ने यह भी अनुरोध किया कि जब्त नमूनों की जांच पंजाब के बाहर किसी सेंट्रल लैब में कराई जाए। कंपनी का आरोप था कि बिना पूर्व सूचना के दुर्भावना से कार्रवाई की गई।

याचिका में कहा गया कि राजिंदर गुप्ता के AAP छोड़कर BJP में शामिल होने के तुरंत बाद यह कार्रवाई की गई, जिससे राजनीतिक उद्देश्य की आशंका पैदा होती है।

वहीं, राज्य सरकार और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कंपनी के पास राष्ट्रीय हरित अधिकरण जाने का वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध है। बोर्ड ने यह भी दलील दी कि पर्यावरण को गंभीर नुकसान की आशंका होने पर बिना पूर्व सुनवाई के भी कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले के मूल विवाद पर कोई अंतिम टिप्पणी करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि बोर्ड यह साबित नहीं कर पाया कि ऐसी कोई आपात स्थिति थी, जिसके कारण बिना नोटिस कार्रवाई करना जरूरी हो गया था।

अदालत ने कहा कि किसी भी कठोर कार्रवाई से पहले कंपनी को कमियों को दूर करने के लिए 30 दिन का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।

इसी के साथ हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है, लेकिन उससे पहले कंपनी को 30 दिन का समय देना होगा। अदालत ने कंपनी को यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि उसके खिलाफ कोई कठोर कदम उठाया जाता है तो वह राष्ट्रीय हरित अधिकरण का रुख कर सकती है।

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