'सतलुज' को ओटीटी से हटाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का इनकार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गायक और एक्टर दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में उपयुक्त पक्षकार नहीं है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि जब याचिकाकर्ता न तो फिल्म के निर्देशक हैं और न ही निर्माता, तो उन्हें यह याचिका दायर करने का अधिकार कैसे है।
इस पर याचिकाकर्ता ने कहा,
"हम याचिका वापस ले लेते हैं और इसे फिल्म के निर्देशक के माध्यम से दोबारा दाखिल करेंगे।"
केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की ओर से सीनियर एडवोकेट धीरज जैन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इसमें कोई जनहित नहीं है और याचिकाकर्ता का इस मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध भी नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि याचिका में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि फिल्म हटाने का आदेश किस प्राधिकारी ने और किस आधार पर जारी किया। साथ ही फिल्म हटाए जाने के बाद संबंधित प्राधिकारी के समक्ष कोई अभ्यावेदन भी नहीं दिया गया।
खंडपीठ ने पूछा कि क्या फिल्म के निर्देशक ने किसी सक्षम प्राधिकारी से संपर्क किया। इस पर केंद्र सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि ऐसा नहीं किया गया।
याचिका में दावा किया गया कि 5 जुलाई को फिल्म को अचानक ओटीटी मंच से हटा दिया गया जिससे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोगों के सूचना प्राप्त करने के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। साथ ही, उन दर्शकों के अधिकार भी प्रभावित हुए जिन्होंने इस सामग्री को देखने के लिए भुगतान किया।
याचिका में यह भी कहा गया कि 'सतलुज' सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता स्वर्गीय जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म है तथा इससे देश की संप्रभुता, अखंडता या सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की पात्रता पर सवाल उठाते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिका वापस लेने की अनुमति दी।