राजनीतिक दुश्मनी का आरोप FIR रद्द करने का आधार नहीं, यदि उसमें संज्ञेय अपराध का खुलासा हो: पटना हाईकोर्ट

Update: 2026-07-01 13:48 GMT

पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या दुर्भावना (Mala Fide) का आरोप लगाकर एफआईआर रद्द नहीं कराई जा सकती, यदि उसमें प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का खुलासा होता हो।

जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक राजनेता ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसकी पत्नी प्रखंड प्रमुख हैं और राजनीतिक दुश्मनी के कारण उसे झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ 23 आपराधिक मामले दर्ज हैं। साथ ही आरोप लगाया कि जांच के दौरान पुलिस उसके घर पहुंची तो उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर भीड़ इकट्ठा कर पुलिस टीम पर हमला किया और सरकारी कार्य में बाधा डाली।

हाईकोर्ट ने पाया कि एफआईआर में पुलिस पर हमला, सरकारी कार्य में बाधा और भीड़ जुटाने के स्पष्ट आरोप हैं, जिनका समर्थन घटना के फोटो और वीडियो से भी होता है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद आरोप संज्ञेय अपराध का खुलासा करते हैं और मामला State of Haryana v. Bhajan Lal के उन सिद्धांतों के दायरे में नहीं आता, जिनके आधार पर एफआईआर रद्द की जा सकती है।

इन परिस्थितियों में कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज कर दी।

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