सहमति से बने किशोर रिश्तों में POCSO केस जरूरत पड़ने पर रद्द हो सकते हैं: मेघालय हाईकोर्ट

Update: 2026-03-30 11:43 GMT

मेघालय हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यद्यपि सहमति की वैधानिक आयु 18 वर्ष है, फिर भी अदालतों को किशोरों के बीच सहमति से बने संबंधों में “ग्राउंड रियलिटी” को ध्यान में रखना चाहिए और उपयुक्त मामलों में POCSO अधिनियम के तहत दर्ज मामलों को रद्द किया जा सकता है।

यह टिप्पणी चीफ़ जस्टिस रेवती मोहिटे डेरे और जस्टिस एच.एस. थांगखिएव की खंडपीठ ने एक संदर्भ का उत्तर देते हुए की। प्रश्न यह था कि क्या BNSS की धारा 528 के तहत सहमति के आधार पर POCSO मामलों को समाप्त किया जा सकता है।

अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट की अंतर्निहित शक्तियां व्यापक हैं और न्याय के हित में या प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए उनका प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन यह केवल असाधारण परिस्थितियों में और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई एक समान नियम (straitjacket formula) नहीं हो सकता और प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

कोर्ट ने POCSO कानून की संरचना में मौजूद व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर भी ध्यान दिलाया। अदालत ने कहा कि सहमति की उम्र 18 वर्ष तय होने के बाद 16 से 18 वर्ष के बीच के सहमति वाले संबंध भी आपराधिक दायरे में आ जाते हैं, जिससे कई मामलों में अत्यधिक कठोर परिणाम सामने आते हैं। अदालत ने यह भी नोट किया कि ऐसे कई मामले किशोरों के आपसी संबंधों से उत्पन्न होते हैं, जहां परिवार के विरोध के कारण शिकायत दर्ज होती है और बाद में पीड़िता अक्सर अपने बयान से मुकर जाती है, लेकिन आरोपी को पूरी आपराधिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया युवाओं की शिक्षा, रोजगार और भविष्य को प्रभावित कर सकती है, भले ही अंततः उन्हें बरी कर दिया जाए। विशेष रूप से मेघालय के संदर्भ में अदालत ने कहा कि स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों, जैसे कि किशोर संबंधों का विवाह या साथ रहने में बदलना तथा खासी, गारो और जैंतिया समुदायों की सामाजिक संरचना, को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि POCSO के तहत अपराध केवल निजी विवाद नहीं होते, बल्कि समाज के खिलाफ अपराध माने जाते हैं। इसलिए, मामलों को रद्द करते समय अदालतों को अत्यंत सावधानी बरतनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि सहमति वास्तविक और सूचित (informed) हो।

अंत में, अदालत ने कहा कि जहां मामले की परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि अभियोजन जारी रखना न्याय के हित में नहीं है—जैसे कि दोनों पक्ष साथ रह रहे हों या विवाहित हों—वहां हाईकोर्ट अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए POCSO मामले को रद्द कर सकता है।

Tags:    

Similar News