राजनीतिक दल या NGO पुलिस थाने और जेल से प्रेस ब्रीफिंग नहीं कर सकते: मेघालय हाईकोर्ट
मेघालय हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों और जेलों का इस्तेमाल पुलिस विभाग के अलावा किसी राजनीतिक दल, गैर-सरकारी संगठन या अन्य गैर-राज्य पक्ष द्वारा प्रेस ब्रीफिंग के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने पुलिस महानिदेशक को सभी पुलिस थानों के लिए इस संबंध में स्पष्ट निर्देश या स्थायी आदेश जारी करने की अपेक्षा जताई।
चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगदोह की खंडपीठ मेघालय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में हिन्यूट्रेप नेशनल यूथ फाउंडेशन के कुछ सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। आरोप था कि इन लोगों ने एक वकील को उनके चैंबर से पकड़ लिया, उनके साथ मारपीट की और उन्हें सार्वजनिक रूप से घुमाने के बाद सदर पुलिस थाने ले गए। इसके बाद संगठन के सदस्यों ने पुलिस थाने के परिसर में घटना को लेकर मीडिया को साक्षात्कार भी दिए।
यह मामला एक महिला ट्रेनी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद सामने आया था। ट्रेनी ने आरोप लगाया कि वकील ने केस की फाइल लेने के बहाने उन्हें अलग कमरे में बुलाकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
हाईकोर्ट ने पुलिस थाने के परिसर में गैर-राज्य पक्ष द्वारा प्रेस ब्रीफिंग किए जाने पर चिंता जताते हुए कहा,
"हम उम्मीद करते हैं कि मेघालय के पुलिस महानिदेशक भी सभी पुलिस थानों के लिए ऐसे निर्देश या स्थायी आदेश जारी करेंगे, जिससे पुलिस थानों और जेलों का इस्तेमाल पुलिस के अलावा किसी राजनीतिक दल, NGO आदि द्वारा प्रेस ब्रीफिंग के लिए न किया जा सके।"
मामले के बाद शिलॉन्ग बार एसोसिएशन ने आरोपी वकील को कारण बताओ नोटिस जारी कर उन्हें निलंबित कर दिया था। एसोसिएशन ने गैर-राज्य पक्षों द्वारा अधिवक्ता को सार्वजनिक रूप से घुमाने और उनके साथ की गई कार्रवाई की भी निंदा की थी।
इसके बाद मेघालय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कथित मारपीट और सार्वजनिक रूप से घुमाए जाने के मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए राज्य के अधिकारियों के समक्ष शिकायत दी। बार एसोसिएशन का आरोप था कि वैधानिक दायित्व होने के बावजूद अधिकारियों ने गैर-राज्य पक्षों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की और FIR तक दर्ज नहीं की गई।
बार एसोसिएशन ने तहसीन पूनावाला बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्य का दायित्व है कि वह गैर-राज्य पक्षों द्वारा की जाने वाली हिंसा के खिलाफ निवारक, उपचारात्मक और दंडात्मक कदम उठाए।
राज्य की ओर से पेश एडवोकेट जनरल ने अदालत को आश्वासन दिया कि उचित कदम जल्द उठाए जाएंगे और इस संबंध में की गई कार्रवाई का विवरण देने वाला हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा।
इस बीच हाईकोर्ट ने पुलिस को घटना से संबंधित वीडियो फुटेज जब्त करने का निर्देश दिया।
अगली सुनवाई में अदालत को बताया गया कि हिन्यूट्रेप नेशनल यूथ फाउंडेशन के कथित सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।
अदालत को यह भी बताया गया कि आरोपी अधिवक्ता की मेडिकल टेस्ट कराया गया और कीटिंग रोड से सदर पुलिस थाने तक की घटना से संबंधित डिजिटल फुटेज एकत्र कर सुरक्षित रखी गई।
राज्य के एडवोकेट जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के तहसीन पूनावाला फैसले के निर्देशों के अनुरूप हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
इसी दौरान पुलिस अधीक्षक ने पुलिस परिसर में गैर-राज्य पक्षों द्वारा प्रेस ब्रीफिंग पर विभागीय स्तर पर स्थायी रोक लगाई।
हाईकोर्ट ने मामले का दायरा बढ़ाते हुए मेघालय बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इससे विभिन्न अदालतों में काम करने वाली महिला वकीलों और ट्रेनी स्टूडेंट्स की सुरक्षा और गरिमा से जुड़े मुद्दों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष सामने आ सकेगा।
अदालत ने कहा,
"व्यापक मुद्दे को देखते हुए हम याचिकाकर्ताओं को मेघालय बार काउंसिल और BCI को पक्षकार बनाने का निर्देश देना उचित समझते हैं, ताकि विभिन्न अदालतों में कार्यरत महिला वकीलों और ट्रेनी स्टूडेंट्स की सुरक्षा एवं गरिमा से जुड़े मुद्दों पर उनका पक्ष सामने आ सके।"