थिरुपरंकुंद्रम दीपथून मामले को मंत्री ने शरारतन राजनीतिक रंग दिया: मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी

Update: 2026-03-03 09:45 GMT

मद्रास हाईकोर्ट ने थिरुपरंकुंद्रम दीपथून (पत्थर स्तंभ) पर कार्तिगई दीपम जलाने के विवाद में तमिलनाडु के मंत्री एस. रेगुपथी की टिप्पणी पर कड़ी नाराज़गी जताई। अदालत ने कहा कि मंत्री ने घटनाक्रम को “शरारतन राजनीतिक रंग” दिया।

मामले की सुनवाई जस्टिस जी आर स्वामीनाथन कर रहे थे। यह सुनवाई उस उप-आवेदन पर हो रही थी, जिसमें राज्य अधिकारियों के खिलाफ लंबित अवमानना याचिका में मंत्री को पक्षकार बनाने की मांग की गई।

मामला

मीडिया की 7 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के आधार पर दलील दी गई कि मंत्री ने कथित रूप से कहा था कि सरकार दीपथून पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति नहीं देगी और निषेधाज्ञा अदालत के आदेश को निष्प्रभावी करने के लिए जारी की गई। मंत्री ने कथित तौर पर इसकी तुलना दाह-संस्कार से करते हुए कहा कि जैसे दाह-संस्कार केवल निर्धारित स्थानों पर होता है, वैसे ही दीप प्रज्ज्वलन भी चिन्हित स्थान पर ही होगा।

अदालत ने कहा कि यह मामला न्यायालय में लंबित है और मंत्री को इस सिद्धांत का ध्यान रखना चाहिए।

कोर्ट ने कहा,

“मैं निष्कर्ष निकालता हूँ कि थिरु. रेगुपथी ने घटनाक्रम को शरारतन राजनीतिक रंग दिया। जिला कलेक्टर द्वारा निषेधाज्ञा जारी करना अवमानना है या नहीं, यह इस न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। उप-न्यायाधीनता का सिद्धांत लागू होगा। माननीय मंत्री इस सिद्धांत को ध्यान में रखें।”

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने कहा कि एक बार न्यायिक आदेश पारित हो जाने के बाद पक्षकारों के पास अपील या पुनर्विचार का विकल्प होता है। सार्वजनिक मंचों पर न्यायिक आदेश के विपरीत राय देना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि मंत्री पहले विधि मंत्री रह चुके हैं इसलिए उन्हें यह मूलभूत सिद्धांत ज्ञात होना चाहिए।

एडिशनल एडवोकेट जनरल ने मंत्री के कथित बयान से इनकार किया और मीडिया रिपोर्ट पर भरोसा न करने की बात कही। हालांकि, अदालत ने नोट किया कि मंत्री ने स्वयं इन दावों का खंडन नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि दाह-संस्कार वाली टिप्पणी पर व्यापक उपहास हुआ, इसलिए मंत्री अज्ञानता का दावा नहीं कर सकते।

मंत्री को तलब नहीं किया

अदालत ने यह भी नोट किया कि जिला कलेक्टर ने अतिरिक्त हलफनामे में मंत्री के कथन से भिन्न रुख अपनाया। कलेक्टर ने कहा कि निषेधाज्ञा जारी करते समय उनका उद्देश्य मंदिर अधिकारियों को दीप जलाने से रोकना नहीं था बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखा गया।

चूंकि कलेक्टर ने मंत्री के कथित रुख का समर्थन नहीं किया, अदालत ने मंत्री को तलब करने से इनकार किया और उप-आवेदन को बंद कर दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर वह मामले को पुनः खोलने में संकोच नहीं करेगी।

प्रतीकात्मक पूजा का सुझाव

अवमानना कार्यवाही के संदर्भ में अदालत ने सुझाव दिया कि आदेश का सम्मान करते हुए न्यायालय द्वारा नामित पाँच व्यक्तियों को पहाड़ी के निचले हिस्से में स्थित दीपथून तक 15 मिनट के लिए जाकर प्रतीकात्मक पूजा करने की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने पक्षकारों को इस सुझाव पर निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई में बताने को कहा।

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