सामान्य वर्ग के स्टूडेंट्स को भेदभाव की शिकायतों से बाहर रखने का आरोप: UGC के इक्विटी नियमों पर एससी की रोक के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट करेगा सर्कुलर की जांच

Update: 2026-05-01 05:37 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टूडेंट शिकायत निवारण समिति को निर्देश दिया कि वह सामान्य वर्ग सहित सभी श्रेणियों के छात्रों से मिली भेदभाव की शिकायतों पर विचार करे।

यह निर्देश याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 2 फरवरी को जारी सर्कुलर को चुनौती दी गई। इस सर्कुलर में सामान्य वर्ग के छात्रों को समिति के समक्ष भेदभाव के आधार पर विवाद उठाने से बाहर रखा गया।

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने निर्देश दिया:

"स्टूडेंट शिकायत निवारण समिति, यदि प्राप्त होती है तो कानून के अनुसार भेदभाव के आधार पर सामान्य वर्ग सहित सभी श्रेणियों के छात्रों की शिकायतों पर विचार करेगी।"

याचिकाकर्ता स्टूडेंट अंबर शर्मा के वकील ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 के खंड 3(c) में जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों के खिलाफ जाति या जनजाति के आधार पर होने वाला भेदभाव बताया गया।

याचिकाकर्ता के वकील ने 'मृत्युंजय तिवारी बनाम भारत संघ' मामले का हवाला देते हुए जोर देकर कहा कि 2026 के विनियमों का खंड 3(c) एक बेबुनियाद धारणा पर आधारित है, जिसमें यह माना गया कि जातिगत भेदभाव एक "अद्वितीय व्यवस्था है और यह कभी भी गैर-आरक्षित और सामान्य वर्ग के व्यक्तियों के खिलाफ काम नहीं कर सकता।"

बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने 'मृत्युंजय तिवारी' मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं में कानून के चार महत्वपूर्ण प्रश्न तैयार किए। सुप्रीम कोर्ट ने आगे यह भी कहा था कि इन विनियमों में अस्पष्टताएं हैं और इनका संभवतः दुरुपयोग किया जा सकता है।

वकील ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2026 के उक्त विवादित विनियमों पर रोक लगाने के तीन दिन बाद राज्य सरकार ने वह विवादित सर्कुलर जारी किया, जो केवल अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), महिलाओं, अल्पसंख्यकों और दिव्यांग (PWD) उम्मीदवारों द्वारा दायर भेदभाव की शिकायतों से संबंधित है। संक्षेप में कहें तो ये विनियम गैर-आरक्षित और सामान्य श्रेणियों को इस दायरे से बाहर रखते हैं।

पीठ ने दलीलें सुनने के बाद भारत संघ और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। इस मामले को छह सप्ताह बाद 15 जून, 2026 को सूचीबद्ध किया जाना निर्धारित है।

Case Title: Amber Sharma v Union of India, WP-5676-2026

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