22 बार सुनवाई के बावजूद आदेश की अवहेलना, एमपी हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दो माह की सजा सुनाई

Update: 2026-03-26 09:27 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश का बार-बार पालन न करने पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराते हुए दो माह की साधारण कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामला 22 बार सूचीबद्ध हुआ फिर भी आदेश का पालन नहीं किया गया।

जस्टिस प्रणय वर्मा की पीठ ने कहा,

“याचिका 22वीं बार सूचीबद्ध हुई और अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया। 06.02.2026 के आदेश के अनुसार प्रतिवादी अवमानना के दोषी है। उन्हें दो माह के साधारण कारावास की सजा दी जाती है।”

हालांकि, अदालत ने इस सजा को तीन सप्ताह के लिए स्थगित भी रखा।

यह मामला एक कर्मचारी की सेवा नियमितीकरण से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने 10 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद 2004 से नियमितीकरण की मांग की थी, लेकिन विभाग ने उसे केवल 7 अप्रैल 2016 से लागू किया।

इसके बाद हाईकोर्ट ने 7 दिसंबर, 2023 के आदेश में निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 2004 से नियमितीकरण और उससे जुड़े सभी लाभ तीन महीने के भीतर दिए जाएं।

हालांकि, दो साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आदेश का पालन नहीं हुआ, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की।

अदालत ने पाया कि कई अवसर दिए जाने के बावजूद अधिकारी आदेश लागू करने में टालमटोल करते रहे। 6 फरवरी 2026 के आदेश में भी अदालत ने माना कि प्रतिवादी जानबूझकर आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं और केवल समय हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

बाद में अधिकारियों ने 12 मार्च, 2026 को नियमितीकरण का आदेश पारित करने की जानकारी दी, लेकिन अदालत ने पाया कि इसके साथ जुड़े अन्य लाभ अब भी नहीं दिए गए।

अदालत ने समय बढ़ाने की मांग खारिज करते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से आदेश की अवहेलना है। इसी आधार पर सभी प्रतिवादियों को दोषी ठहराते हुए दो माह की सजा सुनाई।

अंततः हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए सख्त संदेश दिया कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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