मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी बहू त्विशा शर्मा की दहेज हत्या के मामले में आरोपी, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को जमानत देने से इनकार किया।
जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने कहा:
"मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों, आरोपों की प्रकृति और गंभीरता, जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों, मृतका की मौत से ठीक पहले की परिस्थितियों, सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विशेष रूप से इस तथ्य को देखते हुए कि BNSS की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच अभी चल रही है और महत्वपूर्ण फोरेंसिक रिपोर्ट तथा डिजिटल एक्सट्रैक्शन रिपोर्ट का इंतजार है, यह कोर्ट इस स्तर पर आवेदिका को जमानत देने के पक्ष में नहीं है।"
मृतका 33 वर्षीय महिला थी, जो नोएडा में रहती थी और 'मिस पुणे' रह चुकी थी। 12 मई को वह भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने पति के घर पर फंदे से लटकी हुई पाई गई थी।
मृतका के परिवार ने ससुराल वालों पर लगातार घरेलू हिंसा और प्रताड़ना का आरोप लगाया था। उन्होंने मौत का असली कारण जानने के लिए दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। इस मामले में शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 80(2) (दहेज हत्या), 85 (क्रूरता) और 3(5) (समान इरादा) के तहत FIR दर्ज की गई थी। इसके साथ ही दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 भी लगाई गईं।
पिछली सुनवाई में गिरिबाला के वकील ने दलील दी कि आरोप मुख्य रूप से मृतका के पति (आवेदिका के बेटे) पर लगाए गए और आत्महत्या के लिए उकसाने में उनकी (गिरिबाला की) कोई भूमिका नहीं है।
जमानत का विरोध करते हुए CBI ने तर्क दिया कि आवेदिका एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उन्होंने पहले इस मामले में एक 'समानांतर जांच' (पैरेलल इन्वेस्टिगेशन) भी की थी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
यह मामला शुरुआत में कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे CBI को सौंप दिया गया। भोपाल की एक ट्रायल कोर्ट ने 15 मई को गिरिबाला को अग्रिम जमानत दी थी। राज्य सरकार और मृतक के माता-पिता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने 27 मई को उनकी अग्रिम जमानत रद्द की।
इसके बाद वह हिरासत में रहीं; भोपाल की अदालत ने 30 जून और 14 जुलाई को उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाई। अपनी नियमित जमानत याचिका में, उन्होंने दावा किया कि मृतक डिप्रेशन से जूझ रहे थे और दहेज के लिए परेशान करने के आरोप झूठे हैं।
Case Title : Giribala Singh v State of Madhya Pradesh