पूर्व आदेश की अवहेलना कर TET शर्त दोबारा लगाने पर सीनियर अधिकारी अवमानना का दोषी: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के सीनियर अधिकारी को न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया है।
अदालत ने पाया कि अधिकारी ने महिला कर्मचारी की अनुकंपा नियुक्ति के मामले में पहले से स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद, शिक्षक पात्रता परीक्षा (PET) की शर्त दोबारा लागू कर जानबूझकर अवहेलना की।
जस्टिस प्रणय वर्मा ने अवमानना याचिकाओं के एक समूह पर फैसला सुनाते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी ने 11 अगस्त, 2023 को पारित हाईकोर्ट के आदेश का गंभीर और जानबूझकर उल्लंघन किया।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता महिला को उसके पिता की मृत्यु के बाद, जो परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, 9 फरवरी 2023 को अनुकंपा नियुक्ति के आधार पर प्रयोगशाला शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया। हालांकि, अगले ही दिन यह कहकर उसकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई कि उसने निर्धारित प्रतिशत के साथ शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की।
इस आदेश को चुनौती देते हुए महिला ने हाईकोर्ट का रुख किया।
अदालत ने 11 अगस्त, 2023 के अपने आदेश में नियुक्ति रद्द करने का निर्णय निरस्त करते हुए स्पष्ट कहा कि पिता की मृत्यु और अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन के समय TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य नहीं था।
अदालत ने यह भी कहा कि नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में विभाग को ऐसी शर्तों में छूट देने का अधिकार है।
इसके बावजूद विभाग ने 15 मार्च, 2024 को तथाकथित अनुपालन आदेश जारी करते हुए महिला को पुनः नियुक्त तो किया, लेकिन यह शर्त जोड़ दी कि उसे तीन वर्षों के भीतर अनिवार्य रूप से टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी।
याचिकाकर्ता ने इस शर्त को हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के विपरीत बताते हुए अवमानना याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने कहा कि TET से संबंधित प्रश्न पहले ही अंतिम रूप से तय किया जा चुका था और अधिकारी को उसे दोबारा लागू करने का कोई अधिकार नहीं था।
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब यह मुद्दा पहले ही समाप्त हो चुका है तो उसी शर्त को अनुपालन के नाम पर फिर से थोपना स्वीकार्य नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि 15 मार्च, 2024 का आदेश कोई नई नियुक्ति नहीं था बल्कि केवल एक अनुपालन आदेश था। वास्तव में नियुक्ति रद्द करने का आदेश निरस्त होते ही 9 फरवरी, 2023 की मूल नियुक्ति स्वतः प्रभावी हो गई और किसी नए आदेश की आवश्यकता ही नहीं थी।
न्यायालय ने अधिकारी के इस कृत्य को न्यायिक आदेश को निष्प्रभावी करने का प्रयास बताते हुए इसे गंभीर और जानबूझकर अवमानना करार दिया।
हालांकि अदालत ने संबंधित अधिकारी को दंड के प्रश्न पर सुनवाई का अवसर देते हुए मामले को आगे की कार्यवाही के लिए 10 मार्च, 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।