बिना सुनवाई ताजिया जुलूस और मेले की अनुमति रद्द करना अनुचित: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने MIC का प्रस्ताव रद्द किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) द्वारा मुहर्रम के अवसर पर पारंपरिक ताजिया जुलूस और धोबी घाट पर तीन दिवसीय मेले की अनुमति रद्द करने संबंधी प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सक्षम अधिकारी द्वारा दी गई अनुमति को याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना रद्द करना उचित प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता समिति ने 3 जून 2026 को अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन नगर निगम ने 25 जून को 26 से 28 जून तक मेला आयोजित करने की अनुमति दी और उसी रात MIC ने बिना कोई नोटिस दिए उसे वापस ले लिया। समिति को इसकी जानकारी तब मिली जब 26 जून को मेला शुरू हो चुका था।
कोर्ट ने पाया कि नगर निगम के सक्षम अधिकारी ने निर्धारित शुल्क जमा कराने की शर्त पर तीन एकड़ क्षेत्र में पारंपरिक मेले और ताजिया विसर्जन की अनुमति दी थी। अनुमति आदेश में कहीं भी पिछले वर्ष की शर्तों के उल्लंघन का उल्लेख नहीं था और न ही ऐसा कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत किया गया जिससे यह साबित हो कि समिति ने पहले किसी शर्त का उल्लंघन किया था।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने कहा कि अनुमति दिए जाने के बाद उसे बिना सुनवाई के वापस लेना याचिकाकर्ता की वैध अपेक्षा (Legitimate Expectation) के सिद्धांत के विपरीत है। इसलिए MIC का 25 जून 2026 का प्रस्ताव रद्द किया जाता है और पहले दी गई अनुमति बहाल की जाती है।
भविष्य के लिए अदालत ने निर्देश दिया कि समिति अगले वर्ष से कम-से-कम ढाई महीने पहले अनुमति के लिए आवेदन करेगी और नगर निगम मेले की शुरुआत से कम-से-कम 30 दिन पहले उस पर निर्णय लेगा।