जज से संपर्क करने के मामले में BJP MLA के खिलाफ अवमानना कार्यवाही समाप्त, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक लंबित मामले की सुनवाई कर रहे जज से संपर्क करने के प्रयास को लेकर भारतीय जनता पार्टी विधायक (BJP MLA) संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही समाप्त की। हाईकोर्ट ने उनकी बिना शर्त माफी स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा नहीं करने की सख्त चेतावनी दी।
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने माना कि विधायक का आचरण आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि इस कृत्य से न्यायिक प्रक्रिया में इतना गंभीर हस्तक्षेप नहीं हुआ कि दंड देना आवश्यक हो।
हाईकोर्ट ने कहा,
"हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अवमानना इतनी गंभीर प्रकृति की नहीं थी कि उससे न्यायिक प्रक्रिया में वास्तविक और महत्वपूर्ण बाधा उत्पन्न हुई हो। इसलिए बिना शर्त माफी स्वीकार की जाती है। हालांकि, विधायक होने के नाते उनसे अपेक्षा की जाती है कि भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा न करें।"
मामला उस जनहित याचिका से जुड़ा है जिसमें तीन कंपनियों द्वारा कथित अवैध खनन की शिकायत की जांच पूरी कराने की मांग की गई। याचिका में आरोप था कि ये कंपनियां संजय सत्येंद्र पाठक की हैं। हालांकि, उस याचिका में विधायक पक्षकार नहीं थे।
एक सितंबर 2025 को जब यह मामला जस्टिस विशाल मिश्रा के समक्ष सुनवाई के लिए आया, तब उन्होंने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया था। अपने आदेश में उन्होंने दर्ज किया था कि संजय पाठक ने इस मामले के संबंध में मुझसे चर्चा करने के लिए फोन करने का प्रयास किया, इसलिए मैं इस याचिका पर सुनवाई करने का इच्छुक नहीं हूं।
इसके बाद याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित ने विधायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक और याचिका दायर की। बाद में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा,
"किसी भी लंबित मामले से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े व्यक्ति को उस मामले की सुनवाई कर रहे या सुनवाई करने वाले जज से मिलने, फोन करने या संदेश भेजने का प्रयास नहीं करना चाहिए।"
हालांकि, अदालत ने विधायक के इस स्पष्टीकरण को भी रिकॉर्ड पर लिया कि फोन गलती से लग गया था, जिसे तुरंत काट दिया गया और उसके बाद केवल परिचय संबंधी संदेश भेजा गया। अदालत ने यह भी नोट किया कि विधायक ने जस्टिस विशाल मिश्रा के आदेश में दर्ज तथ्यों का खंडन नहीं किया और अवमानना कार्यवाही के दौरान अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांग ली।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने उनकी माफी स्वीकार करते हुए अवमानना कार्यवाही समाप्त कर दी, लेकिन भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी भी दी।