अनुकंपा नियुक्ति पैतृक संपत्ति नहीं, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगना मनमाना: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Update: 2026-05-05 05:59 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति कोई पैतृक संपत्ति या उत्तराधिकार से मिलने वाला अधिकार नहीं है, इसलिए उसके लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगना मनमाना और कानूनविहीन है।

जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति मृत कर्मचारी के परिवार को अचानक आई आर्थिक कठिनाई से राहत देने के लिए नियोक्ता द्वारा दी जाने वाली रियायत है, न कि ऐसा अधिकार जो उत्तराधिकार के रूप में वारिसों में बंटे।

अदालत ने कहा,

“अनुकंपा नियुक्ति कोई पैतृक संपत्ति या संपत्ति संबंधी अधिकार नहीं है, जो उत्तराधिकार से प्राप्त हो। इसलिए इसके लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की मांग करना मनमाना है और कानून के अधिकार के बिना है।”

मामला सरकारी वाहन चालक की मृत्यु के बाद उत्पन्न हुआ, जिसके पुत्र और पुत्री दोनों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। प्रतिस्पर्धी दावों के चलते राज्य ने दोनों से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने को कहा था।

हाईकोर्ट ने उक्त मांग रद्द करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य उत्तराधिकार विवाद तय करना नहीं, बल्कि मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार को तत्काल सहायता देना है।

अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का निर्धारण संबंधित नीति के अनुसार ही होगा। 2014 की नीति के तहत आश्रितों की प्राथमिकता क्रम स्पष्ट है पहले जीवित जीवनसाथी, फिर पुत्र या अविवाहित पुत्री, उसके बाद विधवा/तलाकशुदा पुत्री या पुत्रवधू, और अंत में विवाहित पुत्री।

चूंकि मामले में मृतक का पुत्र और विवाहित पुत्री दोनों दावेदार थे अदालत ने कहा कि नीति के अनुसार पुत्र को विवाहित पुत्री पर प्राथमिकता प्राप्त है।

हाईकोर्ट ने पुत्र का दावा सही ठहराते हुए राज्य को उसका आवेदन पुनर्विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया।

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