सिर्फ एक ही पूर्वज होना पर्याप्त नहीं, संपत्ति को संयुक्त परिवार की नहीं माना जा सकता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

Update: 2026-03-31 07:52 GMT

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि केवल यह तथ्य कि सभी पक्ष एक ही पूर्वज से संबंधित हैं, अपने आप में यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि संपत्ति संयुक्त परिवार की है।

जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने कहा कि संयुक्त पारिवारिक संपत्ति होने का दावा करने वाले पक्ष पर यह जिम्मेदारी है कि वह इसका प्रथम दृष्टया प्रमाण प्रस्तुत करे।

अदालत ने कहा,

“केवल इसलिए कि मूल पूर्वज महादेव थे, यह नहीं माना जा सकता कि उनके वंशजों के नाम दर्ज कोई भी भूमि संयुक्त परिवार की संपत्ति है, जब तक इसके समर्थन में कोई दस्तावेज प्रस्तुत न किया जाए।”

यह मामला शहदोल जिले की 8 जमीनों से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि वे और प्रतिवादी सभी एक संयुक्त हिंदू परिवार के सदस्य हैं और संपत्ति का कभी बंटवारा नहीं हुआ।

ट्रायल कोर्ट ने प्रारंभिक रूप से याचिकाकर्ताओं के पक्ष में अस्थायी निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) जारी करते हुए प्रतिवादियों को जमीन में हस्तक्षेप या उसे बेचने से रोका था।

हालांकि, अपीलीय अदालत ने इस आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने अपीलीय अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि केवल वंश परंपरा के आधार पर संपत्ति को संयुक्त नहीं माना जा सकता।

अदालत ने यह भी पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ताओं के पूर्वज संबंधित जमीन पर दर्ज थे या उनका उस पर अधिकार था।

इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि संयुक्त पारिवारिक संपत्ति साबित करने का भार याचिकाकर्ता पर ही है और केवल सामान्य पूर्वज का होना पर्याप्त आधार नहीं है।

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