थानों में बिना CCTV वाले हिस्सों में नहीं ले जाए जाएं आरोपी या शिकायतकर्ता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, हिरासत हिंसा रोकने को बॉडी कैमरा अनिवार्य करने के निर्देश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में हिंसा के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि राज्य के किसी भी थाने में आरोपी या शिकायतकर्ता को ऐसे स्थान पर न ले जाया जाए जहां CCTV कैमरे न लगे हों।
अदालत ने पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी कैमरा उपयोग की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया।
जस्टिस सुभोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने इंदौर पुलिस आयुक्तालय को निर्देश देते हुए कहा कि शौचालय और कपड़े बदलने के कक्ष जैसे अपवादों को छोड़कर थानों के सभी हिस्से निगरानी के दायरे में होने चाहिए।
अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि इंदौर पुलिस आयुक्तालय के अपराध पंजीकरण के आधार पर शीर्ष पांच थानों में कार्यरत सभी पुलिसकर्मियों को नौ माह के भीतर बॉडी-वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए जाएं तथा उनके उपयोग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि बॉडी कैमरे पुलिस और नागरिक दोनों के हित में अत्यंत उपयोगी साधन हैं और हिरासत में हिंसा जैसे आरोपों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मामला एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता को थाने के ऐसे कमरे में ले जाकर पीटा गया जहां सीसीटीवी कैमरा नहीं था। याचिका में पुलिसकर्मियों पर मारपीट, मोबाइल से वीडियो मिटाने और धन उगाही के आरोप लगाए गए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटना के संबंध में कोई सीसीटीवी या अन्य दृश्य रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जबकि कथित घटना थाने के पास और थाने के भीतर हुई थी।
अदालत ने कहा कि इस प्रकार के दृश्य साक्ष्य का अभाव स्वाभाविक नहीं है और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध प्रतिकूल अनुमान लगाया जा सकता है।
अदालत ने टिप्पणी की,
“ऐसी घटनाओं में बॉडी कैमरों का महत्व स्पष्ट होता है, लेकिन उन्हें प्रभावी उपयोग के बजाय केवल नाम मात्र के लिए रखा गया।”
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की इस लापरवाही को नई तकनीक अपनाने में “पूर्ण उपेक्षा” बताते हुए कहा कि यह मनमाने और दमनकारी आचरण को जारी रखने की मानसिकता दर्शाता है।
अदालत ने याचिकाकर्ता को हुई प्रताड़ना के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
साथ ही अदालत ने कहा कि निर्देशों के पालन पर अनुपालन रिपोर्ट अगली सुनवाई में प्रस्तुत की जाए।
मामले की अगली सुनवाई 4 जनवरी 2027 को होगी।