मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए CBI को एक सप्ताह का समय दिया। यह मामला उनकी बहू त्विशा शर्मा की मौत और दहेज उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है।

जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने CBI के वकील के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को तय की।

33 वर्षीय त्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत मिली थीं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु, धारा 85 के तहत क्रूरता और धारा 3(5) के तहत समान आशय से किए गए कृत्य के आरोप लगाए गए। इसके अलावा दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत भी मामला दर्ज किया गया।

गिरिबाला सिंह ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया कि डॉक्टरों के बयानों से स्पष्ट होता है कि त्विशा अवसाद से पीड़ित थीं। याचिका में दहेज संबंधी आरोपों को भी गलत बताया गया। उनका कहना है कि ऐसा कोई लेन-देन सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने त्विशा के माता-पिता से कोई धनराशि प्राप्त की। इसके विपरीत, याचिका के अनुसार उनके बेटे ने ट्विशा के खातों में 7.5 लाख रुपये स्थानांतरित किए।

याचिका में यह भी कहा गया कि गिरिबाला सिंह ने जुलाई 2026 में करीब तीन घंटे तक अपने वॉइस सैंपल दिए। इसलिए अभियोजन की ओर से उनके जांच में सहयोग नहीं करने का दावा सही नहीं है।

64 वर्षीय गिरिबाला सिंह ने अपनी उम्र और उच्च न्यायिक सेवा में रहने का हवाला देते हुए कहा कि अब जांच के लिए उनकी हिरासत की आवश्यकता नहीं है और उन्हें नियमित जमानत दी जानी चाहिए। दूसरी ओर, मृतका के पिता ने नियमित जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए आपत्ति आवेदन दाखिल किया।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले की जांच CBI को सौंपी गई। इससे पहले 29 मई को भोपाल की अदालत ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे को पांच दिन की CBI हिरासत में भेजा था। इसके बाद 2 जून को दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जिसे 16 जून को फिर 14 दिनों के लिए बढ़ाया गया।

गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह को निचली अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन आत्मसमर्पण करने की अनुमति के साथ याचिका वापस ली।

वहीं गिरिबाला सिंह को 15 मई को निचली अदालत ने अग्रिम जमानत दी थी। अदालत ने उस समय माना था कि FIR और व्हाट्सऐप चैट में सीधे तौर पर आरोप उनके बेटे के खिलाफ हैं। इस आदेश को राज्य सरकार और ट्विशा के माता-पिता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने 27 मई को उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी।

इसके बाद भोपाल की अदालत ने 30 जून और 14 जुलाई 2026 के आदेशों के जरिए उनकी न्यायिक हिरासत आगे बढ़ाई। अब उनकी नियमित जमानत याचिका पर CBI का जवाब आने के बाद 21 सितंबर को हाईकोर्ट मामले पर आगे सुनवाई करेगा।

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