कोर्ट के समक्ष तथ्य रखना पेशेवर कदाचार नहीं, भले ही उससे दूसरे पक्ष को लाभ मिले : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Update: 2026-08-04 11:26 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कोई लॉ ऑफिसर यदि अपने आधिकारिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हुए कोर्ट के सामने प्रासंगिक तथ्यों को रखता है, तो इसे पेशेवर कदाचार नहीं माना जा सकता, भले ही उन तथ्यों से किसी अन्य पक्ष को लाभ मिल जाए।

एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी दीपली न्यूज़ एडिटर द्वारा दायर रिट अपील खारिज करते हुए की। अपील में एक डिप्टी एडवोकेट जनरल (DAG) पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) का बचाव करने के लिए एकल पीठ के समक्ष तथ्य रखे थे।

मामले में अपीलकर्ता का आरोप था कि DAG ने उस समय CMHO के पक्ष में दलील दी जबकि वह उनके वकील नहीं थे। अपीलकर्ता ने इसे कानूनी नैतिकता का उल्लंघन और अधिवक्ता अधिनियम की धारा 8 के खिलाफ बताया था।

हाईकोर्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि DAG ने न तो CMHO की ओर से कोई वकालतनामा दाखिल किया और न ही उनके वकील के रूप में पेश हुए। उन्होंने केवल कानून अधिकारी के रूप में कोर्ट की सहायता करते हुए यह जानकारी दी थी कि वर्तमान याचिका उसी विवाद से जुड़ी तीसरी कार्यवाही है।

खंडपीठ ने कहा,

"DAG ने केवल अपने आधिकारिक कर्तव्य का पालन करते हुए कोर्ट की सहायता की और उसे बताया कि यह मामला उसी विवाद से संबंधित तीसरी कार्यवाही है। इस तरह की सहायता को पेशेवर कदाचार, कानूनी नैतिकता का उल्लंघन या एडवोकेट जनरल एक्ट की धारा 8 का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।"

मामले की पृष्ठभूमि में अपीलकर्ता ने CMHO के खिलाफ कथित अनियमितताओं को लेकर दिसंबर 2024 और जून 2025 में लोकायुक्त के समक्ष शिकायतें दर्ज की थीं। कार्रवाई नहीं होने पर उसने हाईकोर्ट में स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।

एकल पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि याचिकाकर्ता ने पहले की गई न्यायिक कार्यवाहियों की जानकारी छिपाई है और समान मुद्दे पर दोबारा याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि CMHO को परेशान करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके खिलाफ दायर अपील में याचिकाकर्ता ने कहा कि एकल पीठ ने गलत तरीके से याचिका को दोहराई गई कार्यवाही माना और उसके वकील के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी करने से पहले सुनवाई का अवसर नहीं दिया।

वहीं, प्रतिवादियों की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर पहले की कार्यवाहियों को छिपाया, जबकि पहले भी इसी विषय पर याचिकाएं दाखिल की जा चुकी थीं।

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि CMHO के खिलाफ समान आरोपों को लेकर पहले भी याचिकाएं दाखिल की गई थीं और वे सभी एक ही वकील के कार्यालय के माध्यम से दायर हुईं। कोर्ट ने कहा कि DAG ने केवल इस तथ्यात्मक स्थिति से कोर्ट को अवगत कराया था।

पीठ ने कहा कि DAG के खिलाफ लगाए गए आरोप किसी ठोस आधार पर आधारित नहीं हैं और उन्होंने केवल कानून अधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई है।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने रिट अपील खारिज की और सिंगल बेंच का आदेश बरकरार रखा।

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