डोमिसाइल में तकनीकी गलती पर उम्मीदवार को नहीं किया जा सकता बाहर: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एसएससी अभ्यर्थी को राहत देते हुए कहा कि डोमिसाइल से जुड़ी एक मामूली तकनीकी त्रुटि को तथ्यों को छिपाने के समान नहीं माना जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सख्त नियमों का यांत्रिक तरीके से प्रयोग कर किसी योग्य उम्मीदवार का भविष्य खराब नहीं किया जा सकता।
जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कर्मचारी चयन आयोग द्वारा अभ्यर्थी की उम्मीदवारी खारिज करने का आदेश रद्द किया।
मामला कांस्टेबल (GD) भर्ती परीक्षा 2018 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने ऑनलाइन आवेदन भरा था, लेकिन साइबर कियोस्क पर फॉर्म भरते समय ऑपरेटर की गलती से उसके डोमिसाइल जिले में 'खरगोन' दर्ज हो गया, जबकि वास्तविक डोमिसाइल 'कालापीपल, जिला शाजापुर' था।
अदालत ने पाया कि उसी फॉर्म में उम्मीदवार ने अपना सही पता कालापीपल, शाजापुर ही दर्ज किया था, जिससे स्पष्ट होता है कि यह कोई जानबूझकर की गई गलती नहीं बल्कि तकनीकी त्रुटि थी।
पीठ ने कहा,
“अदालत को अनजाने में हुई तकनीकी गलती और तथ्यों को छिपाने के बीच स्पष्ट अंतर करना होगा। सख्त नियमों का उद्देश्य धोखाधड़ी रोकना है, न कि ईमानदार उम्मीदवार का करियर नष्ट करना।”
अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता ने लिखित परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जो कटऑफ 73.8 प्रतिशत से काफी अधिक थे। इससे यह साबित होता है कि उसे इस गलती से कोई अनुचित लाभ नहीं मिला।
पीठ ने कहा कि यदि उम्मीदवार का गलत इरादा होता तो वह अपने पते में भी बदलाव करता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे यह स्पष्ट है कि यह केवल एक मेकैनिकल स्लिप थी।
अदालत ने यह भी कहा कि धीमे सर्वर और जल्दबाजी में काम करने वाले ऑपरेटर के कारण ड्रॉप-डाउन मेन्यू में गलत विकल्प चुना जाना संभव है और दोबारा पुष्टि करने से भी मानव त्रुटि समाप्त नहीं होती।
हाइकोर्ट ने यह भी पाया कि अधिकारियों ने पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों की भावना को नजरअंदाज करते हुए बिना समुचित विचार के उम्मीदवारी खारिज की, जो मनमानी और अनुचित है।
अंततः अदालत ने खारिजी आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता का डोमिसाइल 'कालापीपल, जिला शाजापुर' माना जाए और उसके मूल प्रमाणपत्र को स्वीकार कर उसकी नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।