'वंदे मातरम्' गाने से इनकार पर जांच की मांग, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर नगर निगम के दो पार्षदों द्वारा कथित रूप से 'वंदे मातरम्' गाने से इनकार करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने संबंधित पक्षों से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई मई के दूसरे सप्ताह में तय की।
याचिका एडवोकेट योगेश हेमनानी द्वारा दायर की गई, जिसमें 8 अप्रैल 2026 को इंदौर नगर निगम की बैठक के दौरान हुई घटना का हवाला दिया गया। आरोप है कि दो निर्वाचित प्रतिनिधियों रुबिना इकबाल और फौजिया शेख आलिम ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के गायन में भाग लेने से इनकार किया और कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं।
याचिका में कहा गया कि 'वंदे मातरम्' का स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसका सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी मुद्दा उठाया गया कि इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट प्रशासनिक दिशानिर्देशों का अभाव है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि संबंधित पार्षदों के आचरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, राज्य सरकार को यह निर्देश देने की भी मांग की गई कि वह सभी नगर निकायों और सार्वजनिक संस्थानों के लिए दिशानिर्देश जारी करे ताकि 'वंदे मातरम्' के दौरान गरिमा और सम्मान बनाए रखा जा सके।