POCSO Act: उम्र छिपाने और फर्जी आधार के जरिए हुई शादी के मामले में मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने आरोपी को दी जमानत

Update: 2026-01-19 06:30 GMT

मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने एक 34 वर्षीय व्यक्ति की जमानत याचिका स्वीकार की, जिस पर अपनी 15 वर्षीय पत्नी के साथ दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता के साथ लड़की के परिवार ने धोखाधड़ी की थी और फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से उसकी वास्तविक उम्र को छिपाकर यह विवाह संपन्न कराया गया।

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की खंडपीठ ने इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि आरोपी ने इस मामले के प्रकाश में आने से पहले ही राजस्थान के बारां जिले में लड़की के परिजनों के विरुद्ध धोखाधड़ी और विश्वासघात की FIR दर्ज करवाई।

धोखाधड़ी और साक्ष्यों का न्यायिक विश्लेषण

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि लड़की के चाचा और चाची, जो इस मामले में सह-आरोपी भी हैं, उन्होंने शादी के समय एक फर्जी आधार कार्ड पेश किया। इस जाली दस्तावेज के अनुसार लड़की की जन्म तिथि 1 दिसंबर, 2002 दिखाई गई और उसका नाम भी परिवर्तित किया गया ताकि उसकी पहचान और आयु के बारे में भ्रम पैदा किया जा सके। आरोपी के वकील ने अदालत के समक्ष शादी के वीडियो और तस्वीरें भी प्रस्तुत कीं, जिनमें लड़की स्वेच्छा से विवाह के कार्यक्रमों में भाग लेती और नाचती हुई दिखाई दे रही थी। इन साक्ष्यों के आधार पर यह तर्क दिया गया कि विवाह जबरन नहीं किया गया।

पीड़िता पर परिवार को नशीला पदार्थ देने और चोरी का आरोप

आरोपी पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि उसने विवाह के लिए लड़की के परिवार को ऑनलाइन माध्यम से लगभग दो लाख दस हजार रुपये का भुगतान भी किया। विवाद तब शुरू हुआ, जब आरोपी को इस पूरी धोखाधड़ी का पता चला। आरोप है कि इसके बाद पीड़िता ने आरोपी और उसके पूरे परिवार के भोजन में कोई नशीला पदार्थ मिला दिया और घर में रखे गहने व अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गई। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि जिस व्यक्ति ने फर्जी आधार कार्ड तैयार करने में मदद की, उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने माना कि आरोपी स्वयं इस साजिश का शिकार हुआ है।

हाइकोर्ट का अंतिम निर्णय और शर्तें

यद्यपि सरकारी वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि लड़की की आयु मात्र 15 वर्ष है और उसे उसके पिता से संपर्क नहीं करने दिया गया, परंतु अदालत ने प्राथमिक साक्ष्यों और दस्तावेजों में हेरफेर को अधिक महत्वपूर्ण माना। हाइकोर्ट ने आरोपी को 25,000 रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि की प्रतिभूति जमा करने पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह शर्त भी लगाई कि आरोपी को सुनवाई के दौरान नियमित रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा और वह कानून द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का कड़ाई से पालन करेगा।

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