भर्ती में अधिक आयु होने पर पहले की देरी के आधार पर छूट नहीं मिल सकती: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट

Update: 2026-01-15 09:45 GMT

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई अभ्यर्थी केवल इस आधार पर आयु में छूट का दावा नहीं कर सकता कि पूर्व की भर्ती प्रक्रिया में देरी हुई। अदालत ने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार नई भर्ती विज्ञप्ति में निर्धारित आयु सीमा को पूरा नहीं करता है, तो वह पहले की भर्ती शर्तों के आधार पर राहत नहीं मांग सकता।

यह टिप्पणी जस्टिस जय कुमार पिल्लै की पीठ ने बुधवार को की। हाइकोर्ट ने कहा कि भले ही वर्ष 2022 की भर्ती प्रक्रिया को पूरा होने में समय लगा हो लेकिन मात्र इस देरी से अभ्यर्थी के पक्ष में कोई स्थायी अधिकार उत्पन्न नहीं हो जाता कि वह बाद की भर्ती प्रक्रिया में, जो अलग शर्तों के अधीन है, पात्रता का दावा करे।

मामले में याचिकाकर्ता ने एमपी लोक सेवा आयोग द्वारा समाजशास्त्र के सहायक प्राध्यापक पद के लिए जारी विज्ञापन में निर्धारित आयु सीमा को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि उसे 50 वर्ष तक आयु में छूट दी जाए, क्योंकि वर्ष 2022 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि वह अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित है, उसकी आयु 46 वर्ष है और वह वर्तमान में वन विभाग में कार्यरत है। उसने तर्क दिया कि वर्ष 2017 में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष थी, जिससे उसे भविष्य की भर्तियों में भी इसी तरह की छूट मिलने की वैध अपेक्षा थी।

याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि वर्ष 2022 की भर्ती में उसका साक्षात्कार सितंबर, 2025 में निर्धारित हुआ, जबकि इस बीच 20 दिसंबर, 2024 को एक नया विज्ञापन जारी कर दिया गया, जिसमें अधिकतम आयु सीमा घटाकर 45 वर्ष कर दी गई। इस कारण वह नई भर्ती में आवेदन करने से वंचित हो गया।

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वर्ष 2022 और 2024 की भर्तियां पूरी तरह अलग हैं और दोनों पर अलग-अलग नियम व शर्तें लागू होती हैं। नई विज्ञप्ति की पात्रता शर्तें सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू हैं।

हाइकोर्ट ने कहा कि सेवा कानून का यह स्थापित सिद्धांत है कि किसी भी भर्ती विज्ञापन में निर्धारित पात्रता शर्तों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। अदालत ऐसे उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति नहीं दे सकती, जो कट-ऑफ तिथि पर निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करते।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व भर्ती में हुई देरी को आधार बनाकर नई भर्ती में पात्रता का दावा नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता की “वैध अपेक्षा” वाली दलील को भी खारिज करते हुए कहा कि स्पष्ट और निर्विवाद नीतिगत निर्णय के विरुद्ध ऐसी अपेक्षा स्वीकार्य नहीं है।

हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अदालत याचिकाकर्ता को आयु में छूट देती है, तो यह न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से एक विशेष श्रेणी बनाने जैसा होगा, जो स्वीकार्य नहीं है।

इन सभी कारणों से हाइकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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