मां ने पति पर लगाया बेटियों के यौन शोषण का आरोप, बेटियों ने कोर्ट में कहा— 'आरोप झूठे हैं, पिता के साथ रहेंगे'
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने पारिवारिक विवाद और झूठे आरोपों से जुड़े एक मामले में बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने एक नाबालिग लड़की को उसकी मां के पास भेजने के बजाय उसके पिता और बड़ी बहन के साथ रहने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने यह फैसला तब लिया जब नाबालिग लड़की ने साफ शब्दों में कहा कि उसकी मां ने वैवाहिक विवाद (Matrimonial Dispute) के चलते उसके पिता को फंसाने के लिए यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाया था।
पूरा मामला क्या है?
यह मामला जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच के सामने तब आया, जब नाबालिग लड़की की बड़ी बहन और पिता ने हाई कोर्ट में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिला बाल संरक्षण अधिकारी और बाल विकास समिति के अध्यक्ष ने मां की शिकायत पर नाबालिग लड़की को उनके घर से जबरन उठा लिया और शेल्टर होम में रख दिया।
दरअसल, मां की शिकायत पर पिता के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। इसमें आईपीसी (IPC) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से आपराधिक बल का प्रयोग), धारा 506 (आपराधिक धमकी) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 9 व 10 (गंभीर यौन उत्पीड़न) शामिल थीं। मां का आरोप था कि पति अपनी ही बेटियों का यौन शोषण कर रहा है।
बेटियों ने कोर्ट में खोली मां की पोल
जब हाई कोर्ट ने मामले की पड़ताल की, तो पता चला कि निचली अदालत (Trial Court) में जिरह के दौरान दोनों बेटियां पहले ही अभियोजन पक्ष के दावों को खारिज कर चुकी थीं।
हाई कोर्ट की बेंच ने जब नाबालिग लड़की से सीधे बातचीत की, तो उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अपने पिता और बड़ी बहन के साथ रहना चाहती है। लड़की ने बताया:
"मेरे पिता ने कभी भी मेरे साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार नहीं किया। वे मेरी सभी जरूरतों का ख्याल रख रहे हैं और एक प्रतिष्ठित प्राइवेट इंस्टीट्यूट से मेरी पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं, जहां मैं जेईई (JEE) की तैयारी कर रही हूं।"
लड़की ने दुख जताते हुए यह भी कहा कि माता-पिता के बीच चल रहे इस झगड़े के कारण उसकी परीक्षाओं की तैयारी का कीमती समय पहले ही बर्बाद हो चुका है।
वहीं, बड़ी बहन (जो खुद बी.टेक ग्रेजुएट है और कामकाजी है) ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता ने हमेशा दोनों बहनों को बेहद प्यार और देखभाल से पाला है। उसने आरोप लगाया कि उसकी मां ने ही उन दोनों बहनों को पिता के खिलाफ यौन उत्पीड़न के झूठे आरोप लगाने के लिए मजबूर और प्रताड़ित (Coerce) किया था।
हाईकोर्ट का फैसला और सुरक्षा के कड़े निर्देश
दोनों बेटियों के बयान सुनने के बाद हाई कोर्ट ने माना कि दोनों लड़कियां समझदार, करियर को लेकर जागरूक और अपने फैसले खुद लेने में सक्षम हैं। अदालत ने कहा कि जब बड़ी बहन पहले से ही पिता के साथ रह रही है और नाबालिग लड़की भी शेल्टर होम या मां के बजाय पिता के साथ रहना चाहती है, तो अदालत को इसमें हस्तक्षेप करने में कोई झिझक नहीं है।
अदालत ने नाबालिग लड़की के सर्वोत्तम हित (Best Interest) को ध्यान में रखते हुए उसकी कस्टडी तुरंत पिता और बड़ी बहन को सौंपने का आदेश दिया।
इसके साथ ही, सुरक्षा के लिहाज से कोर्ट ने कुछ बेहद खास निर्देश भी जारी किए:
पिता और बड़ी बहन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि लड़की को किसी भी तरह की असुविधा न हो
लड़की को अपने पिता के खिलाफ किसी भी तरह की शिकायत होने पर विरोध दर्ज कराने की पूरी आजादी होगी।
इसके लिए पिता को अपनी बेटी को एक मोबाइल फोन उपलब्ध कराना होगा, जिसमें संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारी (SHO) का नंबर सेव रहेगा।
कोर्ट ने संबंधित SHO को भी सख्त निर्देश दिया कि वे दिन या रात के किसी भी समय नाबालिग लड़की के फोन कॉल को खुद अटेंड करना सुनिश्चित करेंगे।
हाई कोर्ट ने इन निर्देशों के साथ याचिका को स्वीकार करते हुए मामले का निपटारा कर दिया।