IPC की धारा 407: गंतव्य से पहले माल उतारना भी आपराधिक विश्वासघात- जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कानून
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी वाहक को माल सुपुर्द किया गया और वह उसे निर्धारित गंतव्य के बजाय रास्ते में ही कहीं और उतार देता है या मार्ग बदल देता है तो यह आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) का अपराध माना जाएगा।
जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि इस अपराध को स्थापित करने के लिए माल की वास्तविक बिक्री या उसके निपटान को साबित करना अनिवार्य नहीं है।
पूरा मामला
यह मामला मार्च, 2006 का है जब विदिशा के जिला आपूर्ति अधिकारी ने 'स्वस्तिक एग्रो मिल' पर छापा मारा था। जांच में पाया गया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के कार्डधारकों के लिए आवंटित गेहूं को सरकारी उचित मूल्य की दुकानों पर ले जाने के बजाय निजी गोदामों में जमा किया जा रहा था। आरोप था कि इस गेहूं को कालाबाजारी के उद्देश्य से छिपाया गया।
इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, विदिशा ने आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 406, 407 और आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धारा 3 और 7 के तहत आरोप तय किए, जिसे हाइकोर्ट में चुनौती दी गई।
हाइकोर्ट की अहम टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता ने जोर देकर कहा कि आपराधिक विश्वासघात का अपराध तब बनता है, जब सुपुर्द की गई संपत्ति का उपयोग अनुबंध या कानूनी निर्देशों के उल्लंघन में किया जाता है।
हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा,
"एक बार जब माल की सुपुर्दगी (Entrustment) स्थापित हो जाती है तो सहमत उद्देश्य से कोई भी विचलन 'अमानत में खयानत' की श्रेणी में आ सकता है। माल को उसके निर्धारित वितरण बिंदु से रास्ते में ही मोड़ना, वाहक द्वारा किया गया गबन है। इसके लिए माल का वास्तव में बेचा जाना जरूरी नहीं है।"
तकनीकी आपत्तियों को किया खारिज
याचिकाकर्ताओं (गोदाम मालिकों, ट्रांसपोर्टरों और ड्राइवरों) ने तर्क दिया कि गेहूं की कीमत की वसूली पहले ही की जा चुकी है और यह केवल एक अनुबंध का उल्लंघन है, न कि कोई अपराध। कुछ ड्राइवरों का कहना था कि उन्होंने बारिश के कारण माल को निजी परिसर में उतारा था।
हाइकोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम आम उपभोक्ताओं को कालाबाजारी से बचाने के लिए बनाया गया। कोर्ट ने कहा कि हाइपर-टेक्निकल आपत्तियों के आधार पर अभियोजन (Prosecution) को शुरुआती चरण में नहीं रोका जा सकता खासकर जब प्रथम दृष्टया आवश्यक वस्तुओं की अनधिकृत हैंडलिंग के सबूत मौजूद हों।
कानूनी स्थिति स्पष्ट
हाइकोर्ट ने यह भी साफ किया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई और IPC के तहत आपराधिक विश्वासघात का मुकदमा एक साथ चल सकता है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि चूंकि अनाज को निर्धारित गंतव्य के बजाय निजी स्थानों पर उतारा गया, इसलिए यह धारा 407 IPC के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
इन टिप्पणियों के साथ जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता ने सभी पांचों याचिकाओं को खारिज कर दिया और ट्रायल कोर्ट में मुकदमे को जारी रखने का आदेश दिया।