'पति से ज़बरदस्ती पैसे ऐंठने की कोशिश': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ₹1.25 लाख महीना कमाने वाली पत्नी को अंतरिम गुज़ारा भत्ता देने से इनकार किया

Update: 2026-04-11 04:36 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पत्नी को राहत देने से इनकार किया। इस पत्नी ने फ़ैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत उसकी अंतरिम गुज़ारा भत्ते की अर्ज़ी को खारिज कर दिया गया।

फ़ैमिली कोर्ट का आदेश सही ठहराते हुए जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने टिप्पणी की कि पत्नी की यह मांग "पति से ज़बरदस्ती पैसे ऐंठने की कोशिश" के अलावा और कुछ नहीं थी, जिसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने यह आदेश देते हुए कहा कि पत्नी पर किसी बच्चे की परवरिश की ज़िम्मेदारी नहीं है और वह खुद हर महीने लगभग ₹1.25 लाख कमाती है, जो उसके पति की आमदनी के लगभग बराबर है।

बेंच ने कहा,

"इस मामले में किसी बच्चे की परवरिश की ज़िम्मेदारी नहीं है। पति-पत्नी के बीच आमदनी को लेकर कोई ऐसी बड़ी असमानता भी नहीं है, क्योंकि दोनों की आमदनी लगभग बराबर है।"

संक्षेप में, दोनों पक्षकारों ने नवंबर 2022 में शादी की थी और जून 2023 से वे अलग रहने लगे। इसके बाद प्रतिवादी/पति ने याचिकाकर्ता/पत्नी के खिलाफ़ तलाक़ की अर्ज़ी दायर की।

इसी बीच पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अर्ज़ी दायर कर मुक़दमा चलने के दौरान (pendente lite) गुज़ारा भत्ते की मांग की। उसने खुद यह बात मानी कि उसकी सालाना आमदनी ₹20.00 लाख है।

उसने दावा किया कि उसके पति की सालाना आमदनी ₹30.00 लाख है। हालांकि प्रतिवादी ने इस बात से इनकार किया।

बहरहाल, फ़ैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में पत्नी को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि पत्नी पर कोई दूसरी ज़िम्मेदारी नहीं है और वह खुद कमा रही है, इसलिए वह मुक़दमा चलने के दौरान किसी भी तरह के गुज़ारा भत्ते की हकदार नहीं है।

फ़ैमिली कोर्ट के आदेश में अधिकार क्षेत्र या तर्क के आधार पर कोई भी गलती न पाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी की यह कोशिश पति से ज़बरदस्ती पैसे ऐंठने की है। इस तरह पत्नी की अर्ज़ी खारिज कर दी गई।

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