धर्मांतरण मामले में आरोपी को राहत नहीं, एमपी हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कथित धर्मांतरण मामले में आरोपी हेमराज टेलर के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के नाबालिग बेटे के बयान समेत रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका की ओर संकेत करती है।
जस्टिस संदीप एन भट्टी की पीठ ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में FIR के आधार पर चल रही कार्यवाही को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं माना जा सकता।
अदालत ने अपने आदेश में कहा,
“रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि FIR के आधार पर जारी कार्यवाही कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है या इससे न्याय का हनन होगा।”
हेमराज टेलर ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। उसकी ओर से दलील दी गई कि आरोप केवल इतने हैं कि उसने शिकायतकर्ता के पति को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया, जबकि शिकायतकर्ता या उसके नाबालिग बेटे के धर्मांतरण में उसकी प्रत्यक्ष भूमिका का कोई प्रमाण नहीं है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जांच के दौरान शिकायतकर्ता और उसके नाबालिग बेटे के बयान दर्ज किए गए, जिनमें आरोपी की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख है। राज्य ने यह भी बताया कि पर्याप्त सामग्री मिलने के बाद ही आरोपपत्र दाखिल किया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता और उसके बेटे के बयानों में परिवार पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने में आरोपी की भूमिका का जिक्र है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी की संलिप्तता का अंतिम परीक्षण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।
अदालत ने नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले या आरोपपत्र दाखिल होने के बाद FIR रद्द करने में अदालतों को अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को ट्रायल के दौरान गवाहों से क्रॉस एग्जामिनेशन करने और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने याचिका खारिज की।