सबरीमला स्वर्ण चोरी मामले में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को भी मिली वैधानिक जमानत
सबरीमला मंदिर से जुड़े स्वर्ण चोरी मामले में केरल की कोल्लम स्थित जांच आयुक्त एवं विशेष जज की अदालत ने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को वैधानिक जमानत प्रदान की। यह आदेश गुरुवार, 5 फरवरी को पारित किया गया।
स्पेशल जज मोहित सी.एस. ने उन्नीकृष्णन पोट्टी को जमानत देने का आदेश दिया। बता दें, उन्नीकृष्णन पोट्टी सबरीमला में पूर्व सहायक शांति रह चुके हैं और इस मामले में प्रमुख आरोपी माने जाते हैं।
पोट्टी को अक्टूबर, 2025 में इस प्रकरण से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया। इससे पहले 21 जनवरी को उन्हें द्वारपालक मूर्तियों से सोना चोरी किए जाने के मामले में भी वैधानिक जमानत मिल चुकी थी। अब उन्हें सबरीमला के श्रीकोविल के द्वार चौखटों से सोने के गबन से जुड़े मामले में वैधानिक जमानत दी गई।
अदालत ने यह जमानत इसलिए प्रदान की, क्योंकि विशेष जांच दल गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने में विफल रहा।
कानून के अनुसार, निर्धारित समयसीमा में आरोपपत्र दाखिल न होने की स्थिति में आरोपी वैधानिक जमानत का हकदार हो जाता है।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपियों को यह जानकारी थी कि द्वारपालक की मूर्तियां सोने से मढ़ी हुई थीं, इसके बावजूद उन्होंने आपराधिक साजिश के तहत झूठी रिपोर्ट दी कि वे केवल तांबे की प्लेटें हैं, जिन्हें सोने से मढ़ा जाना है। आरोप है कि सभी आरोपियों ने मिलकर द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल के द्वार चौखटों से सोने का गबन किया।
उन्नीकृष्णन पोट्टी पर आरोप है कि उन्होंने इस पूरे अपराध की साजिश रची और सोने से मढ़ी वस्तुओं को सोना चढ़ाने के बहाने चेन्नई स्थित 'स्मार्ट क्रिएशंस' नामक इकाई तक पहुंचाया।
उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 403 (बेईमानी से संपत्ति का गबन), 406 (आपराधिक न्यास भंग), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यास भंग), 466 (न्यायालय या सार्वजनिक अभिलेख की कूटरचना), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की कूटरचना), धारा 34 (सामान्य आशय) तथा भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(क) के तहत अपराध दर्ज हैं।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह विशेष अदालत ने द्वारपालक मूर्तियों से जुड़े मामले में छठे आरोपी और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एस. श्रीकुमार को भी जमानत दी थी। इससे पहले मुरारी बाबू को भी वैधानिक जमानत मिल चुकी है।
इस मामले में केरल हाइकोर्ट पहले ही विशेष जांच दल द्वारा आरोपपत्र दाखिल करने में की गई देरी को लेकर कड़ी टिप्पणी कर चुका है।