अगर सक्षम कोर्ट ने शादी रद्द कर दी है तो IPC की धारा 498A के तहत महिला के खिलाफ क्रूरता का अपराध लागू नहीं होगा: केरल हाईकोर्ट

Update: 2026-01-31 07:17 GMT

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक आदमी और उसकी मां के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के तहत क्रूरता का अपराध करने के आरोप में शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने पाया कि एक सक्षम कोर्ट द्वारा शादी रद्द किए जाने के कारण उसके और शिकायतकर्ता के बीच कोई वैध शादी नहीं हुई।

जस्टिस सी. प्रदीप कुमार शिकायतकर्ता के पति और सास द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें उनके खिलाफ कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई।

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि पहले याचिकाकर्ता/पहले आरोपी ने शिकायतकर्ता से धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की थी और जब वे पति-पत्नी के रूप में एक साथ रह रहे थे तो उसने और उसकी मां ने शिकायतकर्ता को शारीरिक और मानसिक क्रूरता का शिकार बनाया। यह भी आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता से 15 सॉवरेन सोना हड़प लिया।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पहले याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता के बीच शादी फैमिली कोर्ट द्वारा रद्द कर दी गई। इसलिए धारा 498A के तहत अपराध लागू नहीं होगा।

पी. शिवकुमार बनाम राज्य और पुराने फैसलों पर भरोसा करते हुए कोर्ट ने कहा,

“इस मामले में पहले आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच शादी एक सक्षम कोर्ट द्वारा रद्द कर दी गई, इसलिए यह माना जाएगा कि पहले आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच कोई वैध शादी नहीं हुई। इस तरह IPC की धारा 498A के तहत अपराध याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लागू नहीं होगा।”

इस प्रकार, कोर्ट ने याचिका स्वीकार की और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ सभी आगे की कार्यवाही रद्द की।

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