EPF Act: बकाया की 25% से कम नहीं हो सकती विलंब दंड राशि- कर्नाटक हाइकोर्ट

Update: 2026-02-27 09:47 GMT

कर्नाटक हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि कर्मचारी भविष्य निधि अंशदान के भुगतान में देरी पर लगाया गया दंड बकाया राशि के 25 प्रतिशत से कम नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस सिद्धांत को लागू करते हुए केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण के उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें तीन लाख रुपये से अधिक की दंड राशि को घटाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया।

मामला उस आदेश से संबंधित है जिसमें 5 दिसंबर 2016 को सहायक भविष्य निधि आयुक्त ने कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम (EPF Act) की धारा 14बी के तहत एक प्रतिष्ठान पर 3,28,083 रुपये का हर्जाना लगाया। आरोप है कि कंपनी ने 20 मार्च 2014 से 31 मार्च 2016 की अवधि के दौरान दो अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों के संबंध में भविष्य निधि अंशदान का भुगतान समय पर नहीं किया। बाद में केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण ने दंड राशि घटाकर 25,000 रुपये कर दी थी। इसके विरुद्ध आयुक्त ने हाइकोर्ट का रुख किया।

खंडपीठ ने कहा कि धारा 14बी के तहत केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त या अधिकृत अधिकारी को यह अधिकार है कि यदि कोई नियोक्ता अंशदान के भुगतान में चूक करता है तो उससे बकाया राशि तक के बराबर हर्जाना वसूल किया जा सकता है।

अदालत ने कहा,

“अधिनियम की धारा 14बी 100 प्रतिशत तक हर्जाना वसूलने की अनुमति देती है, जिसमें ब्याज भी शामिल हो सकता है। हालांकि कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 के पैरा 32ए के तहत दंड की दर निर्धारित है। छह माह या उससे अधिक की देरी पर अधिकतम दंड 25 प्रतिशत प्रतिवर्ष तय किया गया।”

अदालत ने अपने पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि छह माह से अधिक की देरी के मामलों में दंड को बकाया (ब्याज सहित) के 25 प्रतिशत से कम नहीं किया जा सकता।

रिकॉर्ड के अनुसार कुल बकाया और ब्याज मिलाकर 3,10,534 रुपये थे। इसका 25 प्रतिशत 77,633 रुपये होता है जिसे अदालत ने उचित दंड राशि माना।

मामले में संबंधित कंपनी, जो यात्रा सहायता सेवाएं प्रदान करती है, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में पंजीकृत है। जांच के दौरान पाया गया कि कंपनी द्वारा नियुक्त दो विदेशी कर्मचारियों के नाम संबंधित विवरणियों में दर्ज नहीं थे और उनके लिए भविष्य निधि अंशदान जमा नहीं किया गया। कंपनी ने स्पष्टीकरण में कहा था कि वे कर्मचारी पहले कार्यरत थे लेकिन बाद में नौकरी छोड़ चुके थे।

सहायक भविष्य निधि आयुक्त ने 2,04,440 रुपये मूल बकाया और 1,06,094 रुपये ब्याज निर्धारित किया तथा धारा 14बी के तहत 3,28,083 रुपये का दंड लगाया था। न्यायाधिकरण द्वारा इसे घटाकर 25,000 रुपये करने पर मामला हाइकोर्ट पहुंचा।

हाइकोर्ट ने आदेश में कहा,

“हम केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण के 7 सितंबर, 2020 के आदेश में संशोधन करते हुए दंड राशि 77,633 रुपये निर्धारित करते हैं। यदि 25,000 रुपये पहले ही जमा किए जा चुके हैं तो शेष 52,633 रुपये दो सप्ताह के भीतर अदा किए जाएं।”

इसी निर्देश के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।

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