झारखंड हाईकोर्ट ने उपभोक्ता आयोगों के उन पूर्व अध्यक्षों और सदस्यों को भी सेवा जारी रखने का लाभ देने का निर्देश दिया, जो 21 मई 2025 से पहले रिटायर हो चुके थे।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना में संशोधन किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के मनेंद्र भास्कर लिमये मामले में दिए निर्देशों का लाभ केवल 21 मई 2025 या उसके बाद रिटायर्ड हुए पदाधिकारियों तक सीमित कर दिया गया।

जस्टिस दीपक रोशन ने कहा कि 21 मई 2025 सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख मात्र है। यह ऐसी पात्रता तिथि नहीं है, जिसके आधार पर उपभोक्ता आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों को सेवा जारी रखने के लाभ से बाहर किया जा सके।

मामला लातेहार, जामताड़ा, सिमडेगा और दुमका जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों के पूर्व अध्यक्षों और सदस्यों की ओर से दाखिल रिट याचिकाओं से जुड़ा था।

याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2021 में चार साल की अवधि के लिए या 65 वर्ष की आयु तक जो भी पहले हो की गई। वे सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच रिटायर हुए।

विवाद तब पैदा हुआ जब राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सचिव, उपभोक्ता मामले मंत्रालय बनाम डॉ. मनेंद्र भास्कर लिमये मामले में दिए फैसले के बाद 10 अक्टूबर 2025 को अधिसूचना जारी की।

इसमें कहा गया कि 21 मई 2025 या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए अध्यक्ष और सदस्य नई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक अपने पद पर बने रह सकते हैं।

चूंकि याचिकाकर्ता 21 मई 2025 से पहले ही रिटायर हो चुके थे इसलिए उन्हें इस लाभ से बाहर कर दिया गया।

राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का लाभ केवल उन अध्यक्षों और सदस्यों को मिल सकता है, जो 21 मई 2025 को फैसला सुनाए जाने के समय पद पर कार्यरत थे। सरकार के अनुसार पहले ही रिटायर हो चुके पदाधिकारी दोबारा नियुक्ति या सेवा जारी रखने का दावा नहीं कर सकते।

हाईकोर्ट ने राज्य की इस दलील को खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ऐसा कोई कटऑफ नहीं रखा गया।

पीठ ने कहा कि मनेंद्र भास्कर लिमये मामले में दिए निर्देशों के संबंधित हिस्से में यह कहीं नहीं कहा गया कि सेवा जारी रखने का लाभ केवल 21 मई 2025 या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए पदाधिकारियों को ही मिलेगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश उन अध्यक्षों और सदस्यों पर लागू होते हैं, जिन्हें लिमये-1 के फैसले से पहले नियुक्त किया गया और जो उस समय सेवा में थे। यदि नई भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले उनका कार्यकाल समाप्त हो जाता है, तो उन्हें नई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक पद पर बने रहने का लाभ दिया जाना है।

पीठ ने पाया कि सभी याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति अक्टूबर-नवंबर 2021 में हुई थी यानी सुप्रीम कोर्ट के 3 मार्च 2023 के लिमये-1 फैसले से पहले। उनका कार्यकाल नई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने से पहले समाप्त हो गया।

इस आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में निर्धारित श्रेणी में आते हैं। उनका कार्यकाल 21 मई 2025 से पहले समाप्त हुआ या उसके बाद यह सेवा जारी रखने के उनके अधिकार के लिए निर्णायक नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की 10 अक्टूबर 2025 की अधिसूचना में 21 मई 2025 या उसके बाद रिटायर होने की शर्त लगाना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं है। हाईकोर्ट ने इसी सीमा तक अधिसूचना में संशोधन कर दिया।

हाईकोर्ट ने संबंधित याचिकाकर्ताओं को उनके-अपने जिला उपभोक्ता आयोगों में दोबारा सेवा में लेने का निर्देश दिया। साथ ही उनकी सेवा को रिटायरमेंट की तारीख से लेकर नई नियुक्तियां होने या नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाने तक बिना किसी टूट के जारी माना जाएगा।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिमये-1 से पहले नियुक्त और सेवा में रहे अध्यक्षों एवं सदस्यों को अपना कार्यकाल पूरा करने का अधिकार है और यदि नई भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले उनका कार्यकाल समाप्त हो जाता है, तो वे नई भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक पद पर बने रह सकते हैं।

इन निर्देशों के साथ झारखंड हाईकोर्ट ने सभी रिट याचिकाएं स्वीकार कर लीं।

अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: