जमानत देते समय लगाई जाने वाली शर्तें 'कठोर, अनुचित या अत्यधिक' नहीं होनी चाहिए: झारखंड हाइकोर्ट

Update: 2024-03-20 08:41 GMT

झारखंड हाइकोर्ट ने माना कि जमानत देते समय लगाई जाने वाली शर्तें कठोर, अनुचित या अत्यधिक नहीं होनी चाहिए। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि शर्तों का उद्देश्य अधिकारियों के समक्ष अभियुक्त की उपस्थिति, निर्बाध परीक्षण कार्यवाही और समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए।

जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने कहा,

"लगाई जाने वाली शर्तें कठोर, अनुचित या अत्यधिक नहीं होनी चाहिए। जमानत देने के संदर्भ में ऐसी सभी शर्तें प्रासंगिक हैं, जो जांच अधिकारी/न्यायालय के समक्ष अभियुक्त की उपस्थिति, जांच/परीक्षण को निर्बाध रूप से पूरा करने और समुदाय की सुरक्षा की सुविधा प्रदान करती हैं। हालांकि जमानत के लिए पैसे के भुगतान की शर्त को शामिल करने से यह धारणा बनती है कि कथित रूप से धोखाधड़ी से प्राप्त धन जमा करके जमानत हासिल की जा सकती है। यह वास्तव में जमानत देने के प्रावधानों का उद्देश्य और मंशा नहीं है।"

उपरोक्त टिप्पणी न्यायिक मजिस्ट्रेट रांची की अदालत में लंबित मामले से उत्पन्न दो अग्रिम जमानत याचिकाओं में पारित आदेश के हिस्से को रद्द करने के लिए दायर याचिका में आई।

याचिकाकर्ताओं की वकील शिवानी जालुका ने प्रस्तुत किया कि विवाह के आयोजन के संबंध में विवाद हैं। यह आरोप लगाया गया कि विवाह के आयोजन के लिए याचिकाकर्ताओं को निश्चित राशि का भुगतान किया गया। जालुका ने आगे कहा कि विवाह नहीं हुआ और 12 लाख रुपये की राशि पहले ही वापस कर दी गई।

इसके अतिरिक्त उन्होंने उल्लेख किया कि याचिका में दूसरे प्रतिवादी को 12 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश देने की मांग की गई। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को अग्रिम जमानत दे दी गई, जिसे उन्होंने अन्यायपूर्ण बताया। हाइकोर्ट ने अपने अवलोकन में पाया कि आरोपित आदेश में यह भी दर्ज किया गया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रतिवादी नंबर 2 को 12 लाख रुपये की राशि पहले ही वापस कर दी गई। तथापि, अग्रिम जमानत का विशेषाधिकार इस निर्देश के साथ प्रदान किया गया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रतिवादी नंबर 2 को 12 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा।

न्यायालय ने कहा,

“नियमित जमानत मामलों के साथ-साथ अग्रिम जमानत मामलों में भी जमानत के साथ-साथ अग्रिम जमानत देने के मापदंडों पर विचार करते हुए आदेश पारित किए जाने की आवश्यकता है। न्यायालय द्वारा रखी गई शर्त कानून के अनुरूप नहीं प्रतीत होती है।”

उपरोक्त तथ्यों के मद्देनजर दोनों अग्रिम जमानत याचिकाओं में पारित आरोपित आदेश के उक्त भाग को खारिज कर दिया गया।

न्यायालय ने निर्देश दिया,

“याचिकाकर्ताओं को न्यायिक आयुक्त रांची द्वारा पारित दिनांक 29-07-2016 के आदेश के अनुसार प्रतिवादी नंबर 2 को 12 लाख रुपये का भुगतान किए बिना अग्रिम जमानत का विशेषाधिकार प्रदान किया जाएगा।”

न्यायालय ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा,

"यह आदेश नियमित जमानत के साथ-साथ अग्रिम जमानत दिए जाने के मापदंडों पर विचार करते हुए पारित किया गया।"

केस टाइटल- सुधीर नारायण बनाम झारखंड राज्य

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