झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि शादी से पहले अपनी उम्र और हत्या के मामले में उम्रकैद की सज़ा जैसी ज़रूरी बातों को छिपाना हिंदू विवाह अधिनियम के तहत मानसिक क्रूरता है, जिसके आधार पर शादी खत्म की जा सकती है।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पत्नी द्वारा ऐसी बातें छिपाने से पति-पत्नी के बीच भरोसे की डोर टूट जाती है, जिससे पति को इतना मानसिक कष्ट होता है कि दोनों के लिए साथ रहना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की डिवीजन बेंच हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत शादी खत्म करने की अनुमति देने वाले फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी।
दोनों पक्षकारों की शादी 15.04.2019 को गांव पंथा, थाना बसिया, जिला गुमला में हुई थी। पति ने शादी खत्म करने के लिए फैमिली कोर्ट में अर्जी दी, जिसमें उसने कहा कि शादी ज़रूरी बातों को छिपाकर की गई, जिसमें पत्नी की उम्र भी शामिल थी, जिसे कथित तौर पर 27 साल बताया गया, जबकि वह लगभग 40 साल की थी।
पति ने यह भी कहा कि पत्नी दो साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रही थी। उसे एक ऐसे व्यक्ति की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई, जिसे उसका पिछला प्रेमी बताया जाता है। यह भी आरोप लगाया गया कि शादी के बाद पत्नी अक्सर उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी देती और उसे आपराधिक मामलों में फंसाने की भी धमकी देती थी।
तलाक की अर्जी का विरोध करते हुए पत्नी ने अपना लिखित बयान दाखिल किया और आरोपों से इनकार किया। उसने कहा कि उसने शादी से पहले पति को आपराधिक मामले के बारे में बताया और दावा किया कि उसे झूठा फंसाया गया। उसने कहा कि वह शादी बचाना चाहती थी, लेकिन पति तलाक लेने पर अड़ा हुआ था।
हाईकोर्ट ने शादी में क्रूरता क्या होती है, इस पर सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। उसने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से पता चलता है कि पत्नी ने शादी से पहले कई ज़रूरी बातें छिपाईं। कोर्ट ने कहा कि यह भी माना गया कि पत्नी हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सज़ा सुनाए जाने के बाद दो साल तक हिरासत में रही थी।
इसमें कहा गया:
"मानते हैं कि पति-पत्नी का रिश्ता भरोसे की डोर पर टिका होता है। इस मामले में अपील करने वाली पत्नी ने शादी से पहले अपनी उम्र और हत्या के मामले में उम्रकैद की सज़ा के बारे में ज़रूरी बात छिपाकर जो बर्ताव किया, उससे पति को इतना मानसिक कष्ट हुआ कि अब उनके लिए साथ रहना लगभग नामुमकिन है, क्योंकि भरोसे की डोर पहले ही टूट चुकी है। पति-पत्नी का रिश्ता एक-दूसरे पर भरोसे और सम्मान पर आधारित होता है। अगर यह टूट जाए तो इसे ठीक नहीं किया जा सकता, क्योंकि भरोसा ही शादी की नींव है। शादी एक ऐसा रिश्ता है जो आपसी भरोसे, साथ और साझा अनुभवों पर बनता है।"
इसलिए हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला सही ठहराया और तलाक देने का फैसला बरकरार रखा।
Case Title: Ranthi Kumari Devi v. Suresh Kumar Sahu