NDPS Act के तहत तलाशी के लिए गैजेटेड ऑफिसर चुनने के बाद आरोपी को कोई और विकल्प नहीं दिया जा सकता: एचपी हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) की धारा 50 के तहत जांच अधिकारी या किसी अन्य अधिकारी (जिसमें वह गैजेटेड ऑफिसर भी शामिल है, जिसके सामने व्यक्तिगत तलाशी ली जानी है) को आरोपी को कोई नया या तीसरा विकल्प देने की इजाज़त नहीं है, अगर आरोपी पहले ही अपना कानूनी विकल्प चुन चुका है।
कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान केवल दो विकल्पों को मान्यता देता है: या तो सबसे पास के मजिस्ट्रेट के सामने तलाशी ली जाए या सबसे पास के गैजेटेड ऑफिसर के सामने।
जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की:
"कानून उसी अधिकृत व्यक्ति [जांच अधिकारी] और/या किसी अन्य अधिकारी या उस गैजेटेड ऑफिसर द्वारा 'तीसरे विकल्प या नए विकल्प' देने को मान्यता नहीं देता, जिसके सामने व्यक्तिगत तलाशी ली जानी है।"
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 23 फरवरी, 2013 को कुल्लू के गांव '16 माइल्स' में पुलिस पेट्रोलिंग के दौरान राम लाल के स्पोर्ट्स शूज़ से कथित तौर पर 350 ग्राम चरस बरामद होने से जुड़ा है। पुलिस का दावा था कि NDPS Act की धारा 50 के तहत उसके अधिकारों के बारे में बताने के बाद उसने एक गजेटेड ऑफिसर के सामने तलाशी लिए जाने का विकल्प चुना। उसे मनाली पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां तलाशी से पहले उसे कथित तौर पर फिर से विकल्प दिया गया।
राम लाल पर NDPS Act की धारा 20 के तहत आरोप लगाए गए, लेकिन कुल्लू के स्पेशल जज-II ने 9 मार्च, 2015 को उसे बरी कर दिया। राज्य सरकार ने इस बरी किए जाने के फैसले को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने माना कि जब राम लाल पहले ही गजेटेड ऑफिसर के सामने तलाशी का विकल्प चुन चुका था, तो SDPO उसे दूसरा या नया विकल्प नहीं दे सकता। कोर्ट ने कहा कि धारा 50 में केवल दो कानूनी विकल्पों - मजिस्ट्रेट या गजेटेड ऑफिसर - को ही मान्यता दी गई।
कोर्ट ने गौर किया कि घटना स्थल से लगभग 4-5 किमी दूर पतलीकुहल में गजेटेड ऑफिसर मौजूद था, लेकिन आरोपी को लगभग 12 किमी दूर मनाली ले जाया गया। पतलीकुहल में मौजूद ऑफिसर से संपर्क करने की कोई कोशिश नहीं की गई।
कोर्ट ने यह भी पाया कि मामले में स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया, मुख्य पुलिस गवाहों से पूछताछ नहीं की गई, और कथित बरामदगी की तस्वीरों में बरामदगी की जगह और समय के बारे में अभियोजन पक्ष के बयान से विरोधाभास था।
इस प्रकार, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों को बरकरार रखा।
Case Name: State of H.P. v/s Ram Lal