हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन जिले में ठाकुर द्वारा श्री नरसिंह जी मंदिर की बताई जा रही विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को स्पष्ट किया कि इस जमीन पर किसी भी तरह की विकास गतिविधि नहीं होनी चाहिए। आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने सोलन के उपायुक्त, नालागढ़ के उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) और अन्य संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपी है।

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखे और वहां कोई विकास कार्य न होने दे। खंडपीठ ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन सुनिश्चित करने में विफल रहने पर सोलन के उपायुक्त, नालागढ़ के एसडीएम और संबंधित सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

मामला सोलन जिले के मौजा दादी भोला में स्थित 41 बीघा 10 बिस्वा जमीन के स्वामित्व विवाद से जुड़ा है। इस जमीन पर ठाकुर द्वारा श्री नरसिंह जी मंदिर के देवता का अधिकार होने का दावा किया गया।

24 जुलाई 2017 को कुलदीप कौर के पक्ष में जमीन के बदले जमीन के हस्तांतरण संबंधी एक विलेख निष्पादित किया गया। इसके बाद उनके पक्ष में इंतकाल भी मंजूर किया गया। हालांकि, 16 अप्रैल 2018 को यह कहते हुए इंतकाल रद्द कर दिया गया कि संबंधित जमीन मंदिर की है।

इसके बाद कुलदीप कौर ने इंतकाल रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए दीवानी मुकदमा दायर किया। 26 अक्टूबर 2024 को अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और बताया कि 28 अप्रैल 2025 को विवादित जमीन के संबंध में एक और इंतकाल मंजूर किया गया। साथ ही, इस जमीन पर आवासीय नगर नियोजन लेआउट विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने और आगे की कार्यवाही लंबित रहने तक किसी भी प्रकार की विकास गतिविधि रोकने का आदेश दिया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि जमीन की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव न हो।

खंडपीठ ने संबंधित दीवानी मुकदमे का रिकॉर्ड भी तलब करने का निर्देश दिया। साथ ही, मामले से जुड़े प्रासंगिक दस्तावेजों को विधिवत अनुवादित रूप में रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने को कहा।

हाईकोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 12 से 19 तक को नोटिस जारी किया।

मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को होगी।

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