समझौते में उल्लिखित व्हाट्सएप नंबर और ईमेल पते पर सर्विस वैध सर्विस: दिल्ली हाईकोर्ट

Update: 2024-04-15 10:31 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि पार्टियों के बीच समझौते में उल्लिखित व्हाट्सएप नंबर और ईमेल पते पर याचिका की तामील एक वैध सेवा है। जस्टिस प्रतीक जालान की सिंगल जज बेंच ने यह टिप्पणी की।

पार्टियों ने 21 मार्च 2018 को एक पट्टा समझौता किया, जिसमें याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी नंबर 1 को एक वाहन पट्टे पर दिया। समझौते का खंड 10.2 मध्यस्थता खंड था। पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया, जिसके कारण याचिकाकर्ता को मध्यस्थता का आह्वान करना पड़ा। उसने अपनी ओर से अग्रेषित 3 नामों में से मध्यस्थ की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा, हालांकि, प्रतिवादी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। जिसके बाद याचिकाकर्ता ने मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पार्टियों के बीच समझौते में उल्लिखित व्हाट्सएप और ईमेल पते पर याचिका की एक प्रति देने का निर्देश दिया। स्पीड पोस्ट के माध्यम से भी सेवा की अनुमति दी गई। सेवा वर्चुअल मोड के माध्यम से पूरी की गई, हालांकि, पते पर प्रतिवादी नहीं मिलने के कारण स्पीड पोस्ट वापस आ गई।

कोर्ट का विश्लेषण

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक हलफनामा दायर किया है, जो दर्शाता है कि सेवा वर्चुअल मोड के माध्यम से पूरी की गई थी। इसके अलावा, यह देखा गया कि जिस पते पर स्पीड पोस्ट भेजा गया था, उसका उल्लेख पार्टियों के बीच समझौते में किया गया है और मध्यस्थता का नोटिस भी उसी पते पर दिया गया था।

न्यायालय ने माना कि उत्तरदाताओं को उचित रूप से तामील की गई और उन्होंने उपस्थित नहीं होने का विकल्प चुना है, इसलिए, उन्होंने उनकी उपस्थिति के लिए और इंतजार करना आवश्यक नहीं समझा। न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया पार्टियों के बीच मध्यस्थता समझौता मौजूद है। इसके बाद कोर्ट ने विवाद को डीआईएसी के तत्वावधान में मध्यस्थता के लिए भेज दिया।

केस टाइटल: लीज प्लान इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम रुद्रकाश फार्मा डिस्ट्रीब्यूटर, ARB.P. NO. 1273/2023

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