गुजरात हाईकोर्ट ने 21 वर्षीय महिला से कथित तौर पर बार-बार छेड़छाड़ और अश्लील मांग करने के आरोपी 70 वर्षीय व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की उम्र निश्चित रूप से एक प्रासंगिक तथ्य है लेकिन केवल उम्र के आधार पर अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब जांच के दौरान सामने आई सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपों का समर्थन करती हो।

जस्टिस संजीव जे. ठक्कर ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आए घटनाक्रम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(2) के तहत यौन उत्पीड़न और धारा 78(2) के तहत बार-बार पीछा करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया।

अदालत के अनुसार आरोपी पर पहले भी महिला से छेड़छाड़ का आरोप लगा था और कथित तौर पर उसने इसके लिए माफी मांगी थी। इसके बाद 31 जुलाई 2026 को महिला के घर में अकेले होने के दौरान आरोपी के दोबारा उसके पास जाने और अश्लील मांग करने का आरोप है। इसके बाद महिला ने अपने परिवार को इसकी जानकारी दी और पुलिस से संपर्क किया।

जस्टिस ठक्कर ने कहा,

“आरोपी की उम्र 70 वर्ष है। उसकी उम्र निश्चित रूप से एक प्रासंगिक तथ्य है। लेकिन केवल उम्र के आधार पर अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती, जब जांच के दौरान एकत्र सामग्री इस स्तर पर आरोपों का समर्थन करती हो।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि यह केवल एक घटना से जुड़ा मामला नहीं है। जांच में आरोपी के कथित पुराने व्यवहार, उसके द्वारा मांगी गई माफी और उसके बाद 31 जुलाई को इसी तरह के आचरण के आरोप सामने आए हैं।

आरोपी की ओर से दलील दी गई कि वह 70 वर्ष का बुजुर्ग और अस्वस्थ व्यक्ति है। उसके वकील ने कहा कि दोनों परिवारों के बीच पहले से जमीन का विवाद चल रहा है और इसी विवाद के कारण उसे झूठे मामले में फंसाया गया।

बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि शिकायत आरोपी की पत्नी की ओर से दर्ज कराई गई उस प्राथमिकी का बदला लेने के लिए की गई, जो आरोपी को गंभीर चोट पहुंचाए जाने की घटना से संबंधित थी। दलील दी गई कि घटना वाले दिन शिकायतकर्ता का पति और देवर आरोपी के घर गए और उसके साथ मारपीट की। इसके बाद आरोपी की पत्नी ने शिकायत दर्ज कराई।

आरोपी की ओर से यह भी कहा गया कि उसकी उम्र और शारीरिक स्थिति को देखते हुए वह महिला पर कथित तरीके से काबू पाने की स्थिति में नहीं था। यह भी दावा किया गया कि घटना के पूरे दिन वह गांव में मौजूद नहीं था और शिकायत दो दिन की देरी से दर्ज की गई।

राज्य सरकार ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने पहले महिला से छेड़छाड़ की, जिसके बाद उसने माफी मांगी और करीब तीन महीने बाद फिर उसके सामने अश्लील मांग रखी। राज्य ने इस घटनाक्रम के समर्थन में गवाहों के बयानों का भी हवाला दिया।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह आरोपों की सच्चाई पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं कर रहा है। हालांकि, अदालत ने माना कि इस स्तर पर रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री यह दर्शाने के लिए पर्याप्त है कि आरोपों की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जांच जरूरी है।

प्रथम दृष्टया मामला बनता पाए जाने पर हाईकोर्ट ने 70 वर्षीय आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।

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