गुजरात हाईकोर्ट ने पत्रकार रवि नायर की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर Adani Enterprises Ltd. को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। नायर ने मानहानि मामले में जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) के बाद हुई अपनी गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती दी है।

जस्टिस एमके ठक्कर की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि नायर के खिलाफ NBW क्यों जारी किया गया और उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया।

अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। नायर के वकील अभिक चिमनी ने इसका विरोध करते हुए अंतरिम राहत की मांग की और कहा कि मामला अब अपील के चरण में है।

कोर्ट ने कहा कि नोटिस जारी होने के बाद शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आगे कोई और स्थगन नहीं दिया जाएगा।

क्या है मामला?

अडानी एंटरप्राइजेज ने आरोप लगाया है कि नायर ने सोशल मीडिया पर कंपनी और अडानी समूह के खिलाफ झूठे और मानहानिकारक बयान प्रकाशित किए।

10 फरवरी 2026 को मंसा की अदालत ने नायर को मानहानि का दोषी ठहराते हुए एक साल की साधारण कैद और ₹5,000 जुर्माने की सजा सुनाई थी।

सेशन कोर्ट ने बाद में उनकी सजा निलंबित कर जमानत दी थी। नायर का कहना है कि वह केरल में रहते हैं और हर तारीख पर गुजरात पहुंचना उनके लिए मुश्किल है। उन्होंने दावा किया कि उनके वकील नियमित रूप से अदालत में पेश होते रहे हैं।

नायर ने हाईकोर्ट से NBW, हिरासत और संबंधित सेशन कोर्ट के आदेशों को रद्द करने की मांग की है।

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