पीएम मोदी डिग्री विवाद: केजरीवाल-संजय सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस 'राजनीतिक रणनीति' का हिस्सा, अलग ट्रायल से हाइकोर्ट का इनकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री को लेकर दिए गए कथित बयानों से जुड़े मानहानि मामले में गुजरात हाइकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज की।
हाइकोर्ट ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और सांसद संजय सिंह द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस एक सोची-समझी “राजनीतिक रणनीति” का हिस्सा प्रतीत होती है और दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोप एक ही लेन-देन का हिस्सा हैं, इसलिए अलग-अलग ट्रायल का कोई आधार नहीं बनता।
जस्टिस एम.आर. मेंगडेय ने अपने आदेश में कहा कि अरविंद केजरीवाल और सह-आरोपी संजय सिंह, दोनों आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में हैं और इस हाइकोर्ट के पूर्व आदेश के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री की डिग्री को लेकर संदेह जताते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का निर्णय लिया। इसके बाद दोनों नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो भी सार्वजनिक रूप से साझा किए गए। इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों के कृत्य एक ही घटनाक्रम और लेन-देन का हिस्सा हैं।
यह मानहानि का मामला गुजरात यूनिवर्सिटी द्वारा दर्ज कराया गया। यह FIR उस समय दर्ज की गई, जब हाइकोर्ट ने वर्ष 2016 के केंद्रीय सूचना आयोग का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें यूनिवर्सिटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
इसके बाद अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर यूनिवर्सिटी ने आपत्ति जताई।
अरविंद केजरीवाल ने हाइकोर्ट में यह दलील दी कि उनके खिलाफ और संजय सिंह के खिलाफ साक्ष्य अलग-अलग हैं तथा संयुक्त ट्रायल से उनके बचाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, हाइकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा दोनों आरोपियों के खिलाफ जो साक्ष्य पेश किए जाएंगे, वे समान होंगे। गुजरात यूनिवर्सिटी के वकील ने भी अदालत में यह स्पष्ट किया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ एक ही प्रकार के साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे।
हाइकोर्ट ने कहा कि केजरीवाल द्वारा पूर्वाग्रह की बात केवल एक आशंका है और रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि संयुक्त ट्रायल से उन्हें किसी प्रकार की वास्तविक हानि होगी।
अदालत ने यह भी नोट किया कि ट्रायल कोर्ट और सेशन कोर्ट, दोनों ने पहले ही यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपित कृत्य एक ही लेन-देन से जुड़े हैं।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए गुजरात हाइकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अलग ट्रायल की मांग खारिज की और ट्रायल कोर्ट का आदेश सही ठहराया।